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नागौद में अब तक सिंह इज किंग

सतना। सतना जिले के अंदर नागौद विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है जहां 1972 के बाद से सिंह इज किंग की ही कहानी चल रही है। 1972 में नागौद विधानसभा से बाला प्रसाद विधायक बने थे उसके बाद से नागौद विधानसभा में सिंह के अलावा किसी दूसरी जाति को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला आम जनता का या तो सिंह घराने में इतना विश्वास है इसलिए नागौद की जनता हर बार सिंह को ही किंग बना देती है या यूं कहे कि नागौद की जनता में सिंह को लेकर के इतना भय है जिसके चलते कोई दूसरे समाज का व्यक्ति वहां चुनाव नहीं जीत पाता। पच्चीस-तीस साल पहले तक भय का माहौल माना जा सकता है लेकिन आज की तारीख में प्रशासन की इतनी पैनी आंखें हैं कि कोई भी इतनी आसानी से लूटा नहीं जा सकता या जबरदस्ती किसी से वोट डलवाई नहीं जा सकती बावजूद इसके 1977 से लगातार नागौद विधानसभा से चाहे कांग्रेस जीते चाहे बीजेपी जीते लेकिन जीतता सिंह ही है। एक बार राजाराम त्रिपाठी भी कांग्रेस की टिकट से नागौद विधानसभा से अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन उन्हें भी हार का स्वाद चखना पड़ा था 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने दो आश्चर्यजनक प्रयोग किए हैं। कांग्रेस ने यहां पहली बार किसी पटेल जाति को टिकट दी है इतना ही नहीं पटेल जाति की महिला को टिकट दी है यह दूसरा आश्चर्य है। रश्मि सिंह 2018 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ी थी जिन्हें 25700 वोट मिले थे किसी भी दल से चुनाव लडक़र 25700 वोट हासिल करना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन निर्दलीय चुनाव लडक़र 25700 वोट हासिल करना निश्चित तौर पर एक बड़ी बात है और शायद इसी आधार पर कांग्रेस के कमलनाथ ने यादवेंद्र सिंह का टिकट काटकर रश्मि सिंह पटेल को दे दिया इस बार के चुनाव में भी दो सिंह चुनाव मैदान में है भारतीय जनता पार्टी से नागेन्द्र सिंह और बहुजन समाज पार्टी से यादवेंद्र सिंह। यदि वह भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी 2023 का विधानसभा चुनाव जीते हैं तो नागौद में फिर एक बार सिंह इज किंग वाला इतिहास दोहराया जाएगा यदि यादवेंद्र सिंह चुनाव जीतते हैं तो भी सिंह इज किंग वाला इतिहास लेकिन यदि रश्मि पटेल चुनाव जीतती है तो सिंह इज किंग का इतिहास खत्म हो जाएगा और लोग जब भविष्य में नागौद विधानसभा का समाचार बताएंगे या नागौद विधानसभा का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें यह कहा जाएगा की 1977 का चुनाव नागेन्द्र सिंह जीते 1980 का भी चुनाव नागेन्द्र सिंह जीते 1985 में कांग्रेस के रामप्रताप सिंह ने फतह हासिल की 1990 में भी रामप्रताप सिंह दोबारा विजयी हुए यहां पर यह बताना लाजिमी है कि राम प्रताप सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते थे और वर्तमान में गगनेन्द्र सिंह जो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति कर रहे हैं वे रामप्रताप सिंह के सुपुत्र है। यदि गगनेन्द्र सिंह राजनीति में सक्रिय नहीं होते तो राम प्रताप सिंह इतनी आसानी से राजनीति नहीं छोड़ते लेकिन गगनेन्द्र सिंह के चलते राम प्रताप सिंह ने राजनीति से तौबा कर ली 1993 में नागेन्द्र सिंह के भाई रामदेव सिंह ने नागौद से किराफात किया लेकिन वे अब इस दुनिया में नहीं है यदि वे इस दुनिया में होते तो शायद नागेन्द्र राजनीति से संन्यास ले चुके होते और रामदेव सिंह ही राजनीति में सक्रिय दिखाई देते। 1998 में एक बार पुन: राम प्रताप सिंह नागौद विधानसभा से विजयी हुए राम प्रताप सिंह एक बार निर्दलीय चुनाव भी जीतने में कामयाब रहे राम प्रताप सिंह ही एक इकलौते ऐसे व्यक्ति है जो नागौद विधानसभा से निर्दलीय चुनाव जीते हैं। 2003 और 2008 दोनों चुनाव में नागेंद्र सिंह चुनाव जीते लेकिन 2013 में नागेन्द्र सिंह चुनाव नहीं लड़े और भारतीय जनता पार्टी की टिकट से गगनेंद्र सिंह चुनाव लड़े लेकिन वे हार गए फिर भी नागौद में कब्जा सिंह इज किंग का ही रहा और कांग्रेस के यादवेंद्र सिंह 2013 में चुनाव जीत गए 2018 में एक बार फिर मुकाबला नागेन्द्र सिंह और यादवेंद्र सिंह के ही बीच रहा और बहुत मामूली वोटो से नागेन्द्र सिंह 2018 का भी चुनाव जीतने में सफल रहे अब 2023 में भी दो सिंह के बीच में एक महिला चुनाव मैदान में है और यदि रश्मि पटेल चुनाव जीतने पाई तो शायद नागौद से भी पहली महिला होंगी जो विधायक बनने का श्रेय हासिल करेंगी। नागौद में मुकाबला त्रिकोणी है अब देखना यह है कि 2023 में भी सिंह ही किंग बनेगा या कुछ अलग तरीके से नागौद का इतिहास बनेगा।

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