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यदि सिद्धार्थ जीते तो क्या, हारे तो क्या

सतना। सतना के वर्तमान विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू जो पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा के पुत्र है और वर्तमान में सतना विधानसभा से विधायक भी 2023 की विधानसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी ने उन्हें एक बार पुन: अपना प्रत्याशी बनाया और वह बड़ी दमदारी के साथ चुनाव लड़े। यदि सिद्धार्थ कुशवाहा सतना विधानसभा से चुनाव जीत जाते हैं और प्रदेश के अंदर कांग्रेस की सरकार बनती है तो निश्चित तौर पर सिद्धार्थ कुशवाहा का दबदबा बढ़ जाएगा। बहुत संभव है कि सिद्धार्थ कुशवाहा को मंत्री भी बना दिया जाए मंत्री इसलिए बन सकते हैं कि सतना जिले के अंदर पांच विधानसभा सीट है जिसमें नीलांशु चतुर्वेदी को छोडक़र किसी भी व्यक्ति का मंत्री पद के लिए दावा मजबूत नहीं है यदि सतना जिले की पांचों सीट कांग्रेस जीत जाए तो भी सर्वाधिक मजबूत दावा सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू का ही रहेगा यदि रामपुर से कांग्रेस जीतती है तो राम शंकर प्यासी पहली बार के विधायक होंगे रश्मि सिंह जीतती है तो वह भी पहली बार की विधायक होंगी कल्पना वर्मा जीतती हैं तो दूसरी बार की विधायक होंगी नीलंशु चतुर्वेदी बस तीसरी बार विधायक माने जाएंगे ऐसे में डब्बू के रास्ते में यदि कोई रोड़ा अटका सकता है तो नीलांशु चतुर्वेदी ही। फिलहाल जिस तरीके से सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू की कमलनाथ से नजदीकी है उसे देखते हुए एक बार मंत्री बनने की संभावना हो सकती है और यदि मंत्रिमंडल विस्तार में डब्बू को मौका नहीं मिला तो भी सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू कमलनाथ की आंखों के तारे रहेंगे उनका कोई काम रूकेगा नहीं वैसे भी सिद्धार्थ कुशवाहा डब्बू पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष हैं इस लिहाज से कांग्रेस की सरकार में डब्बू का वजूद देखने लायक रहेगा यदि सिद्धार्थ कुशवाहा चुनाव हारे तो भी सिद्धार्थ कुशवाहा का कांग्रेस में वजूद खत्म नहीं होगा सिद्धार्थ कुशवाहा न सिर्फ सतना जिले के नेता है बल्कि आज की तारीख में सिद्धार्थ कुशवाहा को पूरे प्रदेश में कुशवाहा समाज का अगुआ माना जाता है चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस के कमलनाथ सिद्धार्थ कुशवाहा की अनदेखी नहीं कर सकते हां इतना जरूर कहा जाने लगेगा कि पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा भी एक बार चुनाव जीतने के बाद दोबारा कोई चुनाव नहीं जीत पाए और यदि डब्बू चुनाव हारने पाए तो उनके बारे में भी यह कहावत तेजी से प्रचारित होने लगेगी क्योंकि एक बार विधायक चुने जाने के बाद सिद्धार्थ कुशवाहा महापौर का भी चुनाव हार चुके हैं लेकिन इतना तो कहा जा सकता है कि जिस तरीके से अंतिम सांस तक सुखलाल कुशवाहा एक बड़े नेता माने जाते रहे हैं उसी तरीके से सिद्धार्थ कुशवाहा का भी राजनीतिक भविष्य उज्जवल है।

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