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चुनाव में क्यों नहीं दिखी स्वप्ना

सतना। पूरा विधानसभा चुनाव बीत गया लेकिन सतना को रोग मुक्त करने वाली महिला सिर्फ एक दिन तब दिखाई पड़ी जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सतना के दौरे पर थे। राजनीति में पैसों का महत्व होता है ऐसा समझ में आने लगा है सतना और पूरे भारत को रोग मुक्त करने का नारा देने वाली स्वप्ना वर्मा समाज सेवा का ढोंग रच कर राजनीति की शिखर पर पहुंचने का स्वप्न देखने वाली को अचानक भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश कार्य समिति का सदस्य बना दिया। इससे एक बात तो साबित होती है कि अब भारतीय जनता पार्टी में जमीनी लोगों का काम बल्कि पूंजी पतियों का वर्चस्व बढ़ रहा है। नहीं तो रातों-रात स्वप्ना वर्मा को भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य नहीं बनाया जाता। खैर ये भारतीय जनता पार्टी का अंदरूनी मसला है किसको प्रदेश कार्य समिति का सदस्य बनती है और किसको प्रदेश का अध्यक्ष बनती है लेकिन सतना जिले की जनता को एक बात ठीक ढंग से समझ लेना चाहिए कि सतना जिले के अंदर कई बहरूपिया समाज सेवा के नाम पर मेवा खाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं एक नाम तो सबके सामने है जब विधानसभा चुनाव आए तो स्वप्ना वर्मा ने पूरे सतना शहर को रोग मुक्त करने का ढिंढोरा पीट दिया इतनी बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगा दी कि उन होर्डिंग को देखकर रोग भी शर्माने लगे जिस तरीके से रोग मुक्त सतना का प्रचार प्रसार शुरू हुआ उसे देखकर तो ऐसा लगने लगा कि कहीं सतना का मेडिकल कॉलेज बंद न करना पड़े सतना जिले के डॉक्टर कहीं बेरोजगार ना हो जाए लेकिन यह सारे अंदेशे तब खतम हो जब स्वप्ना वर्मा विधानसभा का टिकट न मिलने के बाद जिस तरीके से गधे की सर से सींग गायब होती है उसी तरीके से गायब हो गई। स्वप्ना वर्मा अपने से गायब हो गई या उन्हें सतना के भाजपाइयों ने जबरदस्ती भगा दिया कहीं ऐसा ना हो की रोग मुक्त करने के चक्कर में सतना शहर भाजपा मुक्त हो जाता लेकिन अच्छा हुआ जिसने भी यह निर्णय लिया वह भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में था नहीं तो यदि स्वप्ना वर्मा सतना के प्रत्याशी गणेश सिंह का प्रचार करती तो निश्चित तौर पर लोग यह तो सवाल करते कि सतना रोग मुक्त क्यों नहीं हुआ। एक बात और समस्या पार है कि सतना शहर को अधिकांश लोगों ने धर्मशाला समझ रखा है। जिसका जो मन आता है वह शहर में करने लगता है। सतना शहर में कोई शिविर लगा रहा है तो कम से कम उसे सीएमएचओ से तो अनुमति लेनी चाहिए लेकिन स्वप्ना वर्मा भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई थी तो उन्हें आम आदमियों के जिंदगी से खेलने का लाइसेंस बिना अनुमति के मिल गया। कायदे से सतना शहर के विधायक और सांसद को शहर में लगने वाली चिकित्सा शिविर की प्रमाणिकता तो जांचनी चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ सतना शहर के अधिकांश नेता इस बात से डरे हुए थे की स्वप्ना वर्मा को एक हिंदूवादी संगठन के लोग प्रस्तुत कर रहे थे भारतीय जनता पार्टी के अधिकांश लोग हिंदूवादी संगठन के नाम पर डर जाते हैं हिंदूवादी संगठन के कुछ लोग स्वप्ना वर्मा के नाम पर अपनी दुकान चलाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने सपना वर्मा को सतना विधानसभा से टिकट नहीं दी जिसके चलते स्वप्ना वर्मा अब सतना से गायब हो चुकी है जैसे ही लोकसभा चुनाव आएगा वैसे ही स्वप्ना वर्मा को फिर से सांसद बनने का सपना आएगा और स्वप्ना वर्मा फिर से सतना जिले में अवतरित होकर सतना जिले को रोग मुक्त करने का नाटक करने लगेगी। सतना शहर में और भी लोग स्वास्थ्य शिविर लगाकर नाटक नौटंकी करते रहते हैं लेकिन सतना जिले में ऐसे बहुत कम ही लोग हैं जो निस्वार्थ भाव से आम जनता की सेवा करने का जज्बा रखते हैं यह जितने भी स्वास्थ्य शिविर सतना जिले के अंदर लग रहे हैं कोई सांसद बनना चाहता है कोई विधायक बनना चाहता है कोई पार्षद बनना चाहता है इस तरीके की तमाम अभिलाषाएं पालकर लोग समाज सेवा का ढोंग रखते सच्चाई यह है की जितनी सेवा यह समाज में आम जनता को दिखाते हैं क्या यह समाजसेवी अपने घर परिवार के बड़े बुजुर्गों की ठीक ढंग से सेव कर पा रहे हैं यह पता करने लायक है कोई लोकसभा का चुनाव लडऩा चाहता है कोई विधानसभा का चुनाव लडऩा चाहता है बेशक उसका स्वागत है लेकिन समाज सेवा का ढोंग क्यों रचना। यदि आप वाकई में विशुद्ध समाजसेवी है तो समाज सेवा ही करिए ना राजनीति में आने की क्या जरूरत है और यदि राजनीति में ही जाना है तो समाज सेवा का ढिंढोरा और नगाड़ा मत बजाइए। दोहरा चरित्र जीने की जरूरत क्या है आखिर जनता आपसे यह तो नहीं कह रही है की राजनीति में आने के लिए आप समाज सेवा का ढोंग रचिए और मजेदार बात यह है कि ऐसा ढोंग ढकोसला करने वालों को हिंदूवादी संगठन के एक पदाधिकारी पहले तो प्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दे रहे थे लेकिन जब पूरे शहर में उनकी छिछा लेदर होने लगी तो वह अब छुप-छुप कर संरक्षण दे रहे हैं लेकिन अब सवाल यहां पर यह उठता है कि ऐसे धूम ढकोसला करने वाले लोगों को हिंदूवादी संगठन के लोग समर्थन क्यों दे रहे हैं आखिरकार उनका क्या स्वार्थ है क्या कोई आर्थिक स्वार्थ है या इसके अलावा भी कोई स्वार्थ हो सकता है तभी तो छुप-छुप कर समर्थन दिया जा रहा है। इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी मुझे सतना की जनता पर फक्र है। सतना की जनता जब कोई हवा में उडऩे लगता है तो उसे जमीन पर ला ही देती है। फिलहाल मैं सतना की जनता से उम्मीद करता हूं कि स्वास्थ्य शिविर के बहाने विधानसभा और लोकसभा में प्रवेश की चाहत रखने वालो को तरीके से पहचान ले यह आपके वोटो के लुटेरे हैं। यदि आप उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में झांकने की कोशिश करेंगे तो शायद उनकी जिंदगी में पांच पुराने मित्र भी नहीं दिखेंगे यह सिर्फ स्वार्थवादी लोग हैं और इनका चरित्र है अपना काम साधो, और आगे निकल लो। ऐसे लोगों के आपसे संबंध तभी तक है जब तक उनका स्वार्थ है आपका कोई स्वार्थ होगा तो शायद इन ढोंगी लोगो का फोन भी नहीं उठेगा।

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