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पटवारियों का लिखित आदेश और कानूनी सुरक्षा के बिना मैदान में उतरने से इनकार

भोपाल। स्वामित्व स्कीम के तहत प्रदेश में एक महीने में करीब 50 लाख मकानों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का सरकार का लक्ष्य फिलहाल प्रशासनिक गतिरोध में फंस गया है। अभियान 17 सितंबर से शुरू होना था, लेकिन 20 सितंबर तक भी रजिस्ट्रियों की शुरुआत नहीं हो सकी। भोपाल में ही 41,726 रजिस्ट्रियां की जानी हैं। विवाद की मुख्य वजह काम से ज्यादा उसकी जिम्मेदारी और भविष्य की कानूनी जवाबदेही को लेकर है। इसी मुद्दे को सुलझाने के लिए रविवार को छुट्टी के दिन राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के बंगले पर करीब दो घंटे तक बैठक हुई। इसमें विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार की ओर से पटवारी और तहसीलदारों को भरोसा दिया गया कि काम के दौरान उन्हें परेशानी नहीं होने दी जाएगी और डीड में जरूरी सुधार कर दिए गए हैं। हालांकि, पटवारी संगठन मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित आदेश की मांग पर अड़ा रहा।
पटवारियों का कहना है कि यदि उनकी भूमिका केवल प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और काम कराने तक सीमित है, तो सरकार को इसे स्पष्ट करने वाला लिखित आदेश जारी करना चाहिए। उनका तर्क है कि मैदान में काम करने के दौरान यदि किसी पुराने रिकॉर्ड, नाम, दस्तावेज या आधार संबंधी विवाद सामने आता है तो भविष्य में जवाबदेही किसकी होगी, यह पहले से स्पष्ट होना जरूरी है। बैठक के बाद प्रमुख राजस्व आयुक्त के कार्यालय में भी पटवारियों को बुलाकर बताया गया कि उनकी मांगों के अनुरूप सुधार की कार्रवाई कर दी गई है। इसके बावजूद पटवारियों ने लिखित आदेश, सर्कुलर या ड्राफ्ट उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि केवल मौखिक भरोसे के आधार पर इतने बड़े अभियान की जिम्मेदारी लेना मुश्किल है।
तहसीलदारों की आपत्ति अलग
तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी अपनी भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। संघ का कहना है कि उन्हें उप पंजीयक की शक्तियां दी गई हैं, लेकिन प्रक्रिया तय करने से पहले पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। पुराने राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ियों और उनसे जुड़े भविष्य के विवादों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता है। तहसीलदारों का तर्क है कि पूर्व में किसानों से जुड़ी कई योजनाओं के क्रियान्वयन में बाद में शिकायतें और गड़बड़ियां सामने आईं, जिनकी जवाबदेही अंतत: मैदानी अधिकारियों को झेलनी पड़ी। ऐसे में फ्री रजिस्ट्री अभियान में भी भविष्य की कानूनी कार्रवाई का जोखिम अधिकारियों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
नाम और आधार को लेकर भी सवाल
पटवारियों ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में मूल नाम और आधार संबंधी जानकारी शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल जरूरी है तो इसकी स्पष्ट प्रक्रिया और जिम्मेदारी लिखित रूप से तय होनी चाहिए। पटवारी संगठनों ने करीब 15 प्रावधानों में बदलाव की मांग सरकार के सामने रखी है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने वास्तव में इन प्रावधानों में सुधार कर दिए हैं तो उसका लिखित आदेश जारी किया जाए। इससे मैदानी स्तर पर अधिकारियों को भी स्पष्टता मिलेगी और भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में उनके पास सरकारी आदेश का आधार रहेगा। फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार तेजी से 50 लाख रजिस्ट्रियों का लक्ष्य पूरा करना चाहती है, जबकि मैदानी अमला जिम्मेदारी, प्रक्रिया और कानूनी संरक्षण स्पष्ट होने तक लिखित आदेश मांग रहा है। यही खींचतान अभियान की शुरुआत में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

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