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शक्कर के बाद अब दाल 11 रुपये मंहगी

इसलिए अचानक तुअर दाल में आई तेजी
भोपाल किराना व्यापारी संघ के महामंत्री विवेक साहू के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह मौसम की मार, अपेक्षाकृत कम आवक, परिवहन लागत और मांग का दबाव है। बाहर से आने वाले माल की लागत बढऩे का असर भी थोक बाजार से होते हुए खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है। भोपाल मंडी के उपलब्ध आंकड़ों में भी तुअर की कीमतों में उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। 7 सितंबर को भोपाल मंडी में अरहर/तुअर का भाव 6,850 रुपये प्रति क्विंटल, यानी करीब 68.50 रुपये प्रति किलो था। हालांकि, यह मंडी में साबुत तुअर का भाव है, इसे खुदरा तुअर दाल की कीमत से सीधे नहीं मिलाया जा सकता।
देश में दाल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से आता
दरअसल, भारत में दालों की उपलब्धता घरेलू उत्पादन के साथ आयात पर भी निर्भर करती है। सरकारी आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के अनुसार देश अपनी सालाना दाल की खपत का करीब 18 से 20 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। तुअर इस आयात में सबसे महत्वपूर्ण दालों में है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 59.6 लाख टन दालों का आयात किया। इसमें तुअर का हिस्सा करीब 14.8 लाख टन रहा, जो कुल दाल आयात का लगभग एक चौथाई है। तुअर का बड़ा हिस्सा मोजाम्बिक, म्यांमार और तंजानिया जैसे देशों से आता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार, आयात की गति और समुद्री-परिवहन लागत में बदलाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।
व्यापारियों की नजर म्यांमार और आयात नीति पर
व्यापारी संघ का कहना है कि तुअर की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात को सुचारु रखना जरूरी है। भारत ने तुअर और उड़द के लिए मार्च 2027 तक शुल्क-मुक्त आयात नीति जारी रखी है। इसका उद्देश्य घरेलू उपलब्धता और कीमतों पर दबाव को नियंत्रित करना है। विवेक साहू का कहना है कि यदि बाजार में पर्याप्त आयातित माल और सरकारी बफर स्टाक उपलब्ध कराया जाता है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, कीमतें कब और कितनी नीचे आएंगी, यह आवक, मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। सरकार के पास 45 लाख टन से ज्यादा बफर: किराना व्यापारी सुधीर पांडया के अनुसार मौजूदा कीमतों के बीच सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा सरकारी बफर स्टाक का है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दालों का सरकारी बफर करीब 45 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि निर्धारित बफर मानक करीब 35 लाख टन है. इसमें करीब 10 लाख टन तुअर, 19.5 लाख टन चना, 8.8 लाख टन मूंग और 5.6 लाख टन मसूर शामिल है. कीमतों पर दबाव बढऩे की स्थिति में सरकार इस स्टाक को बाजार में जारी कर सकती है।

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