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MP हाईकोर्ट से याचिकाएं खारिज होने के बाद उज्जैन में शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाए जाने की तैयारी

उज्जैन। कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर मार्ग चौड़ा करने को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से याचिकाएं खारिज होने के बाद नगर निगम- प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। न्यायालय से सड़क निर्माण का कानूनी रास्ता साफ होते ही निगम ने छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं।
निगम अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद कमेटी एवं प्रबंधकों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत पूर्व में ही तीन चरणबद्ध नोटिस थमाए जा चुके हैं। एक सितंबर 2026 को जारी अंतिम आदेश की तय मियाद पूरी हो चुकी है। अब निगम प्रशासन ने मस्जिद प्रबंधकों को स्वतः बाधक निर्माण हटाने के लिए अंतिम अवसर दिया है।
यदि तय समय में चिह्नित हिस्सा नहीं हटाया जाता है, तो निगम का अमला पुलिस और प्रशासनिक बल के सहयोग से उसे विधि अनुसार हटाने की कार्रवाई करेगा। बता दे कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान रोड लाइन में आने वाली जमीन स्वतः निगम में निहित हो जाती है।
मास्टर प्लान की जद में आने वाला हिस्सा ही हटेगा
नगर निगम के लीगल और रिमूवल अमले ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल उसी हिस्से पर केंद्रित होगी, जो मास्टर प्लान 2035 के तहत तय 15 मीटर रोड लाइन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। स्पष्ट किया गया है कि मस्जिद का मुख्य ढांचा सुरक्षित रहेगा, केवल सड़क सीमा में आ रहा लगभग 10 प्रतिशत से भी कम बाधक हिस्सा हटाया जाएगा। संपत्ति क्षति के एवज में निगम की टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) या एफएआर नीति के तहत क्षतिपूर्ति/मुआवजा लेने का विकल्प वक्फ कमेटी के पास उपलब्ध रहेगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण : सिंहस्थ 2028 और राजसी सवारी की सुरक्षा सर्वोपरि
यह मार्ग गोपाल मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ने वाला अत्यंत संवेदनशील ‘महाकाल की राजसी सवारी’ और ‘पेशवाई’ का मुख्य मार्ग है। वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ और त्योहारों के दौरान यहाँ रोजाना लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। संकरे मार्ग के कारण बनने वाली भगदड़ और यातायात जाम की स्थिति को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए इस मार्ग का 15 मीटर चौड़ा होना बेहद अनिवार्य है।

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