अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन नहीं होना चाहिए

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार प्रदेश की खनिज संपदा के जरिए विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में काम कर रही है। अधिकारी इस दिशा में काम करें और अवैध उत्खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाएं। उन्होंने कहा कि अवैध उत्खनन में संलिप्तों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाना चाहिए, फिर वह चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो। मुख्यमंत्री गुरुवार को मंत्रालय में खनिज साधन विभाग की बैठक में विभागीय गतिविधियों और प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की खनिज संपदा प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण पूंजी है। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ ऐसे हो कि प्रदेश को राजस्व मिले, निवेश को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित हों। खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और पर्यावरण-सम्मत तरीके से उपयोग प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नयी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार की खनिज नीतियों का उद्देश्य राजस्व वृद्धि के साथ रोजगार, निवेश और विकास के अवसरों का विस्तार करना हो और राज्य सरकार यही सुनिश्चित कर रही है। डॉ. यादव ने प्रस्तावित नीति के संबंध में कहा कि जिला खनिज निधि का समुचित उपयोग करते हुए खनिज संसाधनों से सम्पन्न जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन, पर्यावरण, सडक़ सुविधाओं और वाटरशेड के मामले में माडल डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित किया जाये। खनिज संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभ का अधिकाधिक हिस्सा जनहित के कार्यों में लगाया जाये।
डीएमएफ राशि से बदलेगी तस्वीर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज संपदा से समृद्ध सिंगरौली जिले को माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिला खनिज निधि यानी डीएमएफ की राशि का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए सिंगरौली में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों को मजबूत किया जाए। इसके साथ ही सडक़ सुविधाओं और वाटरशेड से जुड़े विकास कार्यों पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि खनिज संसाधनों से मिलने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर पर लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में दिखाई दे।
खनिज संसाधनों से राजस्व आय बढ़ाने के प्रयास करें
विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने पालिसी प्रेजेंटेशन में बताया कि विभिन्न प्रयासों के जरिए राज्य में खनिज संसाधनों से राजस्व आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित खनिज नीति में वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक खनिज संसाधनों से राजस्व आय 13720 करोड़ रुपए तक और वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे 30000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 के अंत तक ही सालाना खनिज राजस्व लक्ष्य से भी अधिक (106 प्रतिशत) राजस्व आय प्राप्त कर ली गई है। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी सहित खनिज साधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों के इस्तेमाल के दौरान विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को खनिज क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि खनिज संसाधनों से होने वाले लाभ का अधिक से अधिक हिस्सा जनहित और स्थानीय विकास पर खर्च हो। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 को मंजूरी देते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। सरकार का लक्ष्य खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, रोजगार और खनिज क्षेत्रों के स्थानीय विकास को गति देना है।




