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आउटसोर्स एजेंसियों की मनमानी पर सरकार का डिजिटल शिकंजा

भोपाल। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर होने वाले सरकारी भुगतान पर अब सरकार की सीधी निगरानी रहेगी। विभागों में तैनात आउटसोर्स कर्मियों का पूरा रिकॉर्ड रोम्स (रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। इसमें कर्मचारी की पहचान, योग्यता, पद, तैनाती, उपस्थिति, एजेंसी और वेतन से लेकर अनुबंध व कार्यादेश तक की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन आउटसोर्स एजेंसियों पर पड़ेगा, जिनके जरिए सरकार से पूरी राशि लेने के बावजूद कर्मचारियों को निर्धारित भुगतान से कम वेतन देने की शिकायतें सामने आती रही हैं। वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को 31 अक्टूबर 2026 तक आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद आउटसोर्स सेवाओं के बिल ऑफलाइन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। एजेंसियों के बिल रोम्स पोर्टल से ही जनरेट होंगे। रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं करने वाले विभागों या एजेंसियों के भुगतान पर भी रोक लग सकती है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार न्यूनतम वेतन और अन्य भुगतान की राशि तय करती है। व्यवस्था के मुताबिक एजेंसी को कर्मचारी की सेवा के एवज में निर्धारित राशि का भुगतान किया जाता है, लेकिन कई मामलों में कर्मचारियों को पूरी राशि नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब पोर्टल के जरिए सरकार यह पता कर सकेगी कि किस एजेंसी के पास कितने कर्मचारी हैं, उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है और कर्मचारी के खाते तक वास्तविक रूप से कितनी राशि पहुंच रही है। कर्मचारियों की पहचान और उपस्थिति को आधार आधारित ई-केवाईसी से जोडऩे की व्यवस्था भी की जा रही है। इससे कागजों पर कर्मचारियों की संख्या दिखाकर भुगतान लेने या ऐसे कर्मचारियों के नाम पर बिल लगाने की संभावनाओं पर अंकुश लगाने की कोशिश होगी, जो वास्तव में सेवा में नहीं हैं।
एक पोर्टल पर एजेंसी से कर्मचारी तक पूरा हिसाब
नई व्यवस्था में संबंधित विभाग के साथ-साथ एजेंसी का भी पूरा रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। किस विभाग में किस एजेंसी के कितने कर्मचारी हैं, वे किस पद पर काम कर रहे हैं, उनकी योग्यता क्या है और उनकी तैनाती कहां है—इसकी जानकारी ऑनलाइन रहेगी। पुराने और नए अनुबंध, कार्यादेश तथा एजेंसी से संबंधित दस्तावेज भी पोर्टल पर दर्ज किए जाएंगे। सरकार का फोकस केवल बिल भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि आउटसोर्स व्यवस्था में कर्मचारी से लेकर एजेंसी और एजेंसी से लेकर विभाग तक पूरी भुगतान श्रृंखला को डिजिटल ट्रैकिंग में लाने का है।
70 हजार स्थाई कर्मचारियों के वेतन बढऩे की उम्मीद
इधर लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत 70 हजार से अधिक स्थाई कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का रास्ता भी खुल सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग की राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने इन कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है। समिति के चेयरमैन रमेशचंद्र शर्मा ने गुरुवार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा है। दरअसल, 7 अक्टूबर 2016 को दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने की योजना लागू की गई थी। इसके तहत कर्मचारियों को श्रेणी के अनुसार वेतन और वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया गया था। उनका वेतन 1 सितंबर 2016 तक की सेवा अवधि के आधार पर निर्धारित किया गया था। समिति का कहना है कि योजना लागू हुए करीब दस साल हो चुके हैं। कई कर्मचारी वेतन की अधिकतम सीमा तक पहुंच चुके हैं और करीब पांच साल से उन्हें आगे वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे कर्मचारियों के वेतन में संशोधन की जरूरत बताई गई है। इस तरह सरकार एक ओर आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान को डिजिटल निगरानी में ला रही है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से वेतन सीमा पर अटके स्थाई कर्मचारियों के वेतन में संशोधन की सिफारिश पर भी विचार हो रहा है।

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