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जिले नहीं, अब स्टेट लेवल पर होगी दवा खरीदी

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार दवा खरीदी को जिलों के स्तर से हटाकर केंद्रीकृत करने के साथ अस्पतालों तक दवाओं की सप्लाई के लिए वेयर हाउस नेटवर्क तैयार कर रही है। इसी के साथ मरीज के पर्चे से लेकर जांच, डॉक्टर की सलाह और दवा वितरण तक की प्रक्रिया को डिजिटल करने की योजना पर भी काम चल रहा है। दोनों व्यवस्थाओं के लागू होने पर सीएमएचओ की भूमिका दवा खरीदने के बजाय जरूरत की जानकारी भेजने तक सीमित हो जाएगी। नई व्यवस्था में दवा खरीद का जिम्मा स्टेट हेल्थ कॉरपोरेशन के स्तर पर रहेगा। प्रदेश में करीब दस बड़े शहरों में वेयर हाउस बनाए जाने की तैयारी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अलावा छह अन्य शहरों का चयन कनेक्टिविटी और सप्लाई नेटवर्क के आधार पर किया जाएगा। इन वेयर हाउस से आसपास के जिलों के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ब्लॉक स्तर की स्वास्थ्य संस्थाओं तक दवाएं भेजी जाएंगी। निजी एजेंसी के जरिए वेयर हाउस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और शहरों का सर्वे किया जा रहा है।
ओपीडी पर्ची से दवा तक सब ऑनलाइन करने की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था में मरीज की ओपीडी पर्ची कंप्यूटर पर बनेगी। जांच और मरीज के लक्षणों की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होगी। डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले ही मरीज की प्राथमिक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं भी डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा होंगी और दवा काउंटर पर मरीज को दवा के साथ पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी। यानी सरकार की तैयारी सिर्फ दवा खरीदी का अधिकार सीएमएचओ से लेने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य जिला स्तर की खरीदी से लेकर अस्पताल में मरीज के इलाज तक पूरी प्रक्रिया को केंद्रीकृत और डिजिटल सिस्टम से जोडऩा है।
सीएमएचओ खरीदेंगे नहीं, सिर्फ डिमांड भेजेंगे
अभी जिलों में दवा खरीदी की जिम्मेदारी सीएमएचओ स्तर पर रहती है। नई व्यवस्था में सीएमएचओ को ब्लॉक और अस्पतालों से दवाओं की जरूरत जुटाकर कॉरपोरेशन को भेजना होगा। इसके बाद कॉरपोरेशन संबंधित एजेंसी को डिमांड देगा और दवाओं की सप्लाई सीधे निर्धारित स्वास्थ्य संस्थान तक होगी। इस बदलाव के पीछे दवा खरीदी में सामने आई शिकायतों और कुछ जिलों में अनियमितताओं को भी एक कारण माना जा रहा है। व्यवस्था के केंद्रीकरण से खरीदी और वितरण की निगरानी राज्य स्तर पर करने की कोशिश होगी। सरकार की तैयारी सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की खरीदी और आपूर्ति को भी इसी तरह केंद्रीकृत व्यवस्था से जोडऩे की योजना है। इससे जिलों की अलग-अलग खरीदी के बजाय एक समान प्रक्रिया लागू करने का प्रयास होगा।
300 करोड़ से बदलेगा मरीज का पूरा सफर
दवा खरीदी में बदलाव के साथ स्वास्थ्य विभाग करीब 300 करोड़ रुपए खर्च कर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को पेपरलेस करने के प्रस्ताव पर भी काम कर रहा है। इसके लिए बिहार में लागू डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का अध्ययन किया गया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बिहार दौरे के बाद अधिकारियों की टीम ने वहां की व्यवस्था का अध्ययन कर रिपोर्ट दी है। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश में डिजिटल मॉडल लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

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