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जीरो फैटेलिटी का लक्ष्य, गड्ढे बन रहे सबसे बड़ा रोड़ा

भोपाल। मध्यप्रदेश में सडक़ हादसों में मौतों को शून्य करने के लक्ष्य के साथ सरकार ने जीरो फैटेलिटी मॉडल पर काम तेज कर दिया है, लेकिन इस लक्ष्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद सडक़ें हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 2023 के बीच सिर्फ गड्ढों से जुड़े हादसों में 596 लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में प्रदेश के नौ जिलों में लागू होने जा रहा रोड सेफ्टी एक्शन प्लान सिर्फ ब्लैक स्पॉट और ट्रैफिक नियमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सडक़ की इंजीनियरिंग खामियों को दूर करना भी इसकी बड़ी कसौटी होगी।
प्रदेश के सभी 55 जिलों के लिए रोड सेफ्टी एक्शन प्लान तैयार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी द्वारा चयनित जीरो फैटेलिटी जिलों में दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को शून्य करने के लक्ष्य के साथ हाई एक्सीडेंट डेंसिटी कॉरिडोर और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। जीरो फैटेलिटी कार्यक्रम के शुरुआती चरण में छह जिले शामिल थे। इनमें धार, सागर, सतना, रीवा, जबलपुर और खरगोन शामिल हैं। अब इसमें तीन बड़े शहर भोपाल, इंदौर और उज्जैन भी जोड़े गए हैं। इन जिलों का चयन पिछले पांच वर्षों के सडक़ हादसों और मृत्यु दर के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर किया गया है। यहां दुर्घटना संभावित स्थानों को चिह्नित कर इंजीनियरिंग सुधार, प्रवर्तन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को एक साथ लागू करने की योजना है।
तीन साल में गड्ढों से 596 मौतें
सडक़ सुरक्षा की चुनौती का अंदाजा गड्ढों से जुड़े हादसों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वर्ष 2021 में 711 गड्ढों से जुड़े हादसों में 220 लोगों की मौत हुई। 2022 में 759 हादसों में 199 मौतें और 2023 में 1205 ऐसे हादसों में 177 लोगों की जान गई। यानी तीन साल में गड्ढों से जुड़े 2675 हादसों में 596 मौतें दर्ज हुईं। 2024 और 2025 में भी गड्ढों से होने वाले हादसों का सिलसिला जारी रहा। यही वजह है कि जीरो फैटेलिटी मॉडल में सडक़ के गड्ढों और खतरनाक हिस्सों की समय पर मरम्मत को अहम स्थान दिया गया है।
30 सितंबर तक गड्ढे भरने की डेडलाइन
एक्शन प्लान के तहत सडक़ इंजीनियरिंग में सुधार के लिए गड्ढे भरने, रम्बल स्ट्रिप्स और रोड स्टड लगाने तथा जंक्शनों को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बारिश के बाद खराब हुई सडक़ों की मरम्मत के लिए संबंधित विभागों को 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। पीडब्ल्यूडी ने भी सडक़ मरम्मत के लिए अक्टूबर की समयसीमा तय की है।
ब्लैक स्पॉट पर स्थायी सुधार
सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगाने के बजाय दुर्घटना संभावित स्थानों की मूल खामी दूर करने पर जोर दिया जाएगा। ब्लैक स्पॉट और हाई एक्सीडेंट डेंसिटी कॉरिडोर में सडक़ की डिजाइन, जंक्शन, संकेतक, रोड मार्किंग और प्रकाश व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। अवैध पार्किंग और अतिक्रमण हटाने के साथ सडक़ों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को हटाने की कार्रवाई भी योजना में शामिल है।
हादसा हुआ तो पहला घंटा अहम
रोड सेफ्टी प्लान का दूसरा बड़ा हिस्सा दुर्घटना के बाद की व्यवस्था है। घायलों को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने, तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और कैशलेस इलाज सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। आईआईटी मद्रास से प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को सडक़ सुरक्षा मित्र के रूप में तैनात करने की योजना है। ये स्वयंसेवक दुर्घटना की स्थिति में तत्काल मदद के साथ सडक़ सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे।
हर जिले में सेफ स्कूल जोन और मॉडल जंक्शन
सडक़ सुरक्षा गतिविधियों की निगरानी के लिए डैशबोर्ड तैयार किया गया है। भारतीय सडक़ कांग्रेस के मानकों के अनुरूप प्रत्येक जिले में सेफ स्कूल जोन और मॉडल जंक्शन विकसित करने के प्रस्ताव भी मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, नियमों का सख्ती से पालन कराने और अवैध पार्किंग पर कार्रवाई की जाएगी। वाहनों का बीमा अनिवार्य कराने के लिए नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। अब असली परीक्षा एक्शन प्लान की जमीन पर अमल की होगी। जीरो फैटेलिटी का लक्ष्य तभी हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा, जब ब्लैक स्पॉट के साथ उन गड्ढों और सडक़ खामियों को भी समय पर ठीक किया जाए, जो लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं।

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