
भोपाल। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि राज्य सरकार की तरफ से प्रदेश भर में गौशाला स्थापित करने के लिए करोड़ों की राशि जारी होने के बाद भी अभी तक उनका ठीक से अता-पता तक नहीं है। स्थापित गौशालाएं धरातल पर कम, कागजों में अधिक दिख रही हैं। बता दें कि सरकार प्रदेश में 10 हजार से अधिक सरकारी गौशालाएं खोलने जा रही है। इसमें भोपाल शहर में 42 गौशालाओं की स्थापना प्रस्तावित है। इनमें से अभी तक केवल 14 गौशालाएं ही स्थापित हो सकी हैं। उनमें भी नाम मात्र के लिए गौवंश हैं। शेष गौशालाएं अभी अपूर्ण हैं। अधिकतर में अभी तक काम ही शुरू नहीं हो सका है। यही वजह है कि शहर के अंदर एक लाख गौवंश सडक़ों पर पॉलिथिन, प्लास्टिक और झूठन खाती घूम रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अकेले भोपाल शहर में लगभग एक लाख गौवंश हैं। इनमें तीन-चौथाई से अधिक गौवंश लाव्रिस हैं। इनमें भी अधिकतर गायें हैं। अभी तक सिर्फ 14 गौशालाएं ही बन पाई। इसमें सिर्फ 4200 गौवंश ही रखे जा सकते हैं। ऐसे में बाकी गौवंशों की सुरक्षा भगवोत् भरोसे ही हो रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पशुधन विभाग ने 42 गौशालाओं के लिए 12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। फिलहाल विभागीय की लेटलतीफी से शहर की 28 गौशालाओं का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इसे शुरू होने में कम से कम छह से आठ माह और लगेंगे। विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि गौशालाओं की कमी से गौवंश की सुरक्षा नहीं हो पाती है। बता दें कि तीन माह पहले यह राशि जारी की गयी थी। कायदे में इन गौशालाएं स्थापित हो जानी थीं।
आधुनिक गौशाला का निर्माण में देरी: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने तीन माह पहले नीलबड़ क्षेत्र के बरखेड़ी डोब में 25 एकड़ क्षेत्र में लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक गौशाला का निर्माण के लिए भूमिपूजन किया था। इसकी क्षमता अकेले 10,000 गायों को रखने की है। लेकिन इसका निर्माण सुस्त गति से होने से अभी तक ये पूरा नहीं हो सका।
नगर निगम की जिम्मेदारी पर संसाधन नहीं
राजधानी में सडक़ों पर विचरण करते गौवंशों की सुरक्षा के लिए इन्हें पूकडऩे का जिम्मा नगर निगम का है, लेकिन निगम के पास संसाधन की कमी है। निगम के अधिकारी कहते हैकि गौवंश पकडऩे सिर्फ दो वाहन, 4 कर्मचारी है। गौवंशों की संख्या को देखते हुए यह बहुत कम हैं।
कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने शुरू किए गौशाला: सरकार ने गौपालकों को बढ़ावा देने के लिए अनुदान राशि देने का निर्णय किया है। इस अनुदान राशि को 20 से बढ़ाकर 40 रुपए प्रति गाय प्रतिदिन कर दिया है। इस पहल से पुराने भोपाल से लगे करोंद, लांबाखेडा, छोला आदि क्षेत्रों में कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने सामान्य गौशाला तो शुरू कर दिए, लेकिन धनाभाव के चलते गौवंशों को रख नहीं पाए। इससे चलते गौवंशों की सुरक्षा नहीं होने से ये सडक़ों पर आ गए। इससे इनकी जान खतरे में हैं।




