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जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर तय होगा राशि का प्रावधान

भोपाल। मध्यप्रदेश के आगामी बजट में विभागों की मांग के मुताबिक राशि आवंटित करना आसान नहीं होगा। वित्त विभाग अब प्रस्तावों की जरूरत, उनकी लागत और प्राथमिकता को बारीकी से परखने की तैयारी में है। वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट के लिए विभागवार चर्चा का पहला दौर पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण में चुनिंदा प्रस्तावों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। इस प्रक्रिया में विभागों को अपनी मांग के औचित्य और प्रस्तावित खर्च की जरूरत स्पष्ट करनी होगी।
बजट चर्चा के पहले चरण में वित्त विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न विभागों के उप सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ बैठकें कर योजनाओं और अन्य कार्यों के लिए मांगी गई राशि पर विचार किया। अब दूसरे चरण में उन प्रस्तावों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनके लिए अधिक विस्तार से आकलन की जरूरत है। वित्त विभाग यह समझने का प्रयास करेगा कि संबंधित योजना या काम के लिए वास्तव में कितनी राशि जरूरी है और बजट में कितना प्रावधान किया जाना चाहिए।
मांग नहीं, जरूरत के आधार पर तय होगी प्राथमिकता
दूसरे चरण की चर्चा में केवल विभागों की मांग दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रस्तावों की उपयोगिता, उनकी जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर बजट में जगह देने पर विचार किया जाएगा। इससे विभागों के बीच उपलब्ध संसाधनों के बंटवारे को लेकर वित्त विभाग की भूमिका अहम हो जाएगी। जिन प्रस्तावों के लिए अतिरिक्त राशि मांगी गई है, उनके औचित्य और आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा होगी। यह चरण नवंबर के मध्य तक चलेगा। इसके बाद विभागों से मिले प्रस्तावों और बैठकों में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर बजट प्रावधानों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आगे सचिव स्तर पर भी बजट चर्चा प्रस्तावित है, जबकि जनवरी में वित्त मंत्री के स्तर पर विभागवार बैठकें होंगी।
अनुपूरक बजट के प्रस्ताव भी मांगे
इधर, वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दूसरे अनुपूरक बजट की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके लिए सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रस्ताव 22 अक्टूबर तक आईएफएमआईएस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से ऑनलाइन भेजे जाएं। विभागों ने प्रस्ताव भेजना शुरू कर दिया है।
बजट की तैयारी का आगे का कार्यक्रम
2027-28 के बजट पर दूसरे चरण की चर्चा नवंबर मध्य तक होगी। उसके बाद 16 नवंबर से 14 दिसंबर तक सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ तीसरे चरण की बैठकें होंगी। वहीं 15 से 31 जनवरी 2027 तक वित्त मंत्री के स्तर पर विभागवार बजट बैठकें होंगी। 15 जनवरी बजट भाषण के लिए विभागों से जानकारी भेजने की अंतिम तिथि है। 31 मार्च पुनर्विनियोजन, समायोजन और प्रत्यर्पण संबंधी आदेश वित्त विभाग को भेजने की अंतिम तिथि है। बजट तैयार करने की इस प्रक्रिया में विभागों की वित्तीय जरूरतों और सरकार की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी। अब देखना होगा कि समीक्षा के बाद किन योजनाओं को अतिरिक्त राशि मिलती है और किन प्रस्तावों को प्राथमिकता के क्रम में पीछे रखा जाता है।

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