बिजली कंपनियों का घाटा, उपभोक्ताओं पर बनेगा बोझ

भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को अगले वित्त वर्ष से महंगी बिजली का झटका लग सकता है। वर्ष 2027-28 के लिए बिजली दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। यदि विद्युत नियामक आयोग ने इस पर मुहर लगाई तो प्रदेश के करीब 1.83 करोड़ उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल चुकाना होगा। खास बात यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर अन्य श्रेणियों तक को प्रभावित करने वाले इस प्रस्ताव पर दो महीने में 100 आपत्तियां भी दर्ज नहीं हो पाई हैं। बिजली कंपनियों की ओर से टैरिफ बढ़ाने के पीछे परिचालन खर्च, बिजली खरीदी की लागत, वित्तीय स्थिति और वितरण हानि जैसे कारण बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कोयले की बढ़ती कीमतों और जीएसटी दर 18 प्रतिशत होने से लागत बढऩे का तर्क भी दिया गया है। तीनों बिजली वितरण कंपनियां घाटे में चल रही हैं। वहीं, सरकार पर कंपनियों का बकाया भी बताया जा रहा है, जिसकी वसूली में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में टैरिफ बढ़ोतरी के प्रस्ताव ने सवाल खड़ा किया है कि कंपनियों की वित्तीय मुश्किलों का बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर ही क्यों पड़े।
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने नए टैरिफ प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं और संगठनों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो महीने में आयोग को 100 से कम आपत्तियां मिली हैं। आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया अभी जारी है। प्रस्तावित दरों में बढ़ोतरी का असर प्रदेश के सभी 1.83 करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, लेकिन अब तक इस पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया सीमित रही है। आयोग के सामने आई आपत्तियों में वितरण हानि के प्रस्तावित लक्ष्य पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ आपत्तियों में केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना का भी उल्लेख किया गया है। उपभोक्ताओं की कम भागीदारी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करेगी।
तीन साल में सिर्फ 207 सुझाव
टैरिफ पर उपभोक्ताओं की भागीदारी के आंकड़े भी बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। पिछले तीन वर्षों में आयोग के सामने बिजली दरों को लेकर कुल 207 आपत्तियां और सुझाव ही दर्ज हुए। इस बार भी प्रस्तावित बढ़ोतरी के मुकाबले आपत्तियों की संख्या कम है। हालांकि, आपत्तियां कम मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उपभोक्ता प्रस्ताव से सहमत हैं। इसके पीछे जानकारी का अभाव, प्रक्रिया की जटिलता या लोगों की सीमित भागीदारी जैसे कारण भी हो सकते हैं।
आयोग की सुनवाई के बाद होगा फैसला
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि वर्ष 2027-28 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। विद्युत नियामक आयोग इस संबंध में आपत्तियां दर्ज कर रहा है और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करेगा। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस पर फैसला लेगी। अब निगाहें आयोग की जनसुनवाई और अंतिम टैरिफ आदेश पर हैं। प्रस्तावित 15 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी लागू होती है तो बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल यह बढ़ोतरी अंतिम नहीं है, लेकिन कंपनियों की लागत और घाटे का हवाला देकर दरें बढ़ाने की तैयारी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।




