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प्रदेश में फिर चलेंगी सरकारी बसें, सुगम होगा सफर

भोपाल। प्रदेश में 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी बस सेवा शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर इंदौर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। पहले चरण में इंदौर में 23 रूट बसें चलेंगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य शहरों और जिलों को बस सेवा से जोड़ा जाएगा। नई व्यवस्था में बसें पूरी तरह सरकारी स्वामित्व की नहीं होंगी। परिवहन विभाग रूट के परमिट जारी करेगा और निजी बस संचालक पीपीपी मॉडल पर एग्रीमेंट कर बसों का संचालन करेंगे। सरकार रूट, किराया, संचालन के मानक और निगरानी व्यवस्था तय करेगी। बसों में साधारण, सेमी डीलक्स, डीलक्स, एसपी डीलक्स और लग्जरी श्रेणी की सेवाएं उपलब्ध होंगी। मिडी बसों में 23 से 34 सीट, जबकि स्टैंडर्ड बसों में 35 से 70 सीट होंगी। पूर्व में राज्य परिवहन निगम मुख्य रूप से साधारण बसों का संचालन करता था। वर्ष 2004-05 में पुरानी राज्य परिवहन सेवा बंद हो गई थी। जानकारी के मुताबिक परिवहन विभाग बस संचालन के लिए प्रदेश के 55 जिलों का रूट सर्वे कर चुका है और डेटा आधारित लगभग 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट मार्ग विकसित किए जाएंगे। इन रूट के जरिए विभिन्न शहरों के साथ जिलों और प्रदेश की सीमाओं से लगे राज्यों तक बस कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के 75 प्रतिशत विकासखंडों को सुगम बस परिवहन सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में प्रदेश में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हो रही हैं। अगले छह महीनों में 486 नई पीएम ई-बस और 34 नई इंटरसिटी बसें बेड़े में शामिल करने की योजना है। इसके बाद वर्ष 2027 तक बसों की संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य रखा गया है। बसों के संचालन और रखरखाव के लिए मौजूदा सात डिपो के अलावा अगले छह महीनों में 100-100 बसों की क्षमता वाले नौ नए अत्याधुनिक डिपो विकसित किए जाएंगे। इससे बसों की पार्किंग, मरम्मत और रखरखाव के लिए अलग से आधारभूत ढांचा तैयार होगा। नई व्यवस्था के संचालन और नियंत्रण के लिए मप्र यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवायपीआईएल) नाम की राज्य स्तरीय कंपनी बनाई गई है। इसके अधीन सात क्षेत्रीय कंपनियां काम करेंगी। ये कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में बस संचालन की निगरानी और समन्वय करेंगी। प्रदेश को परिवहन संचालन के लिहाज से इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर के सात क्षेत्रीय हिस्सों में बांटा गया है।
जीपीएस से लाइव ट्रैकिंग, सीसीटीवी और पैनिक बटन भी
नई बस सेवा में सुरक्षा और निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए जाएंगे। लाइव लोकेशन और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए बसों की निगरानी की जाएगी। आईटी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से यह देखा जा सकेगा कि बस निर्धारित रूट पर चल रही है या नहीं, समय-सारणी का पालन हो रहा है या नहीं और संचालन में किसी तरह की अनियमितता तो नहीं है। महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है।

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