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सत्ता, सेवा और संबंध: आईएएस अवि प्रसाद की तीसरी पारी

रिजर्व बैंक की सुरक्षित नौकरी से लेकर सिविल सेवा की ऊंचाइयों तक… और फिर निजी जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच तीसरी बार सात फेरे। प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है अवि प्रसाद। करियर की चमक और निजी जीवन के फैसलों ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा किया है।

रिजर्व बैंक से आईएएस तक

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले अवि प्रसाद ने उच्च शिक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। वे पहले भारतीय रिजर्व बैंक में मैनेजर बने। नौकरी के साथ तैयारी जारी रखी और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 2014 में 13वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने। इससे पहले वे 2013 में आईपीएस के लिए भी चयनित हो चुके थे।

 राजनीतिक विरासत की पृष्ठभूमि

अवि प्रसाद का परिवार राजनीति से भी जुड़ा रहा है। उनके दादा टम्बेश्वर प्रसाद उर्फ बच्चा बाबू, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सरकार में मंत्री रहे थे। यही वजह मानी जाती है कि प्रशासनिक सेवा में वे राजनीतिक दबावों के आगे झुकने से बचते हैं।

निजी जीवन की तीन कहानियां

पहली शादी:
दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी के दौरान आईएएस रिजु बाफना से विवाह हुआ, लेकिन कुछ वर्षों में दोनों अलग हो गए।

दूसरी शादी:
2016 बैच की आईएएस मिशा सिंह से विवाह किया। यह रिश्ता भी लगभग चार वर्षों में समाप्त हो गया।

तीसरी शादी:
अब 2017 बैच की आईएएस अंकिता धाकरे के साथ 11 फरवरी को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में विवाह बंधन में बंधे। अंकिता धाकरे वर्तमान में राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी हैं।

चर्चा का केंद्र क्यों?

एक ओर तेजतर्रार प्रशासनिक अधिकारी की छवि, दूसरी ओर निजी जीवन के लगातार बदलते अध्याय—अवि प्रसाद का नाम दोनों कारणों से सुर्खियों में है। रिजर्व बैंक से लेकर कूनो नेशनल पार्क तक का यह सफर बताता है कि उनकी जिंदगी में फैसले भी बड़े हैं और चर्चा भी।

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