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सतना में नाले पर “पक्का खेल” : रसूख के दम पर प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़?

सतना। शहर के कोलगांवा थाना क्षेत्र में किया (KIA) कार एजेंसी के पास स्थित पुलिया पर नाले के अस्तित्व से छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कमल नारायण मैरिज गार्डन संचालक द्वारा मैरिज गार्डन को सीधे नेशनल हाईवे से जोड़ने के लिए प्राकृतिक नाले की दिशा और चौड़ाई में बदलाव कर पक्का निर्माण कराया जा रहा है।

30 फीट का नाला, 3 फीट की पाइपलाइन में तब्दील!

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, लगभग 30 फीट चौड़े प्राकृतिक नाले को महज 3 फीट की पाइपलाइन में सीमित कर उसके ऊपर लॉन और बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी गई। अब आगे बढ़ते हुए हाईवे से सीधा कनेक्शन देने के लिए नाले के ‘नेचुरल फ्लो’ एरिया को बाधित कर कंक्रीट ढांचा खड़ा किया जा रहा है। यह सिर्फ अतिक्रमण नहीं, बल्कि शहरी जलनिकासी तंत्र के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है।

जलभराव का खतरा, जिम्मेदार कौन?

विशेषज्ञों का मानना है कि नालों की चौड़ाई घटाने और बहाव की दिशा बदलने से बारिश के दौरान पानी का दबाव बढ़ता है, जिससे आसपास की कॉलोनियों में जलभराव, सड़क धंसने और संपत्तियों को नुकसान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सवाल यह है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा हादसा या बाढ़ जैसी स्थिति बनती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह निर्माण कार्य प्रशासन और संबंधित विभागों की जानकारी के बिना संभव नहीं। नगर निगम, राजस्व और हाईवे अथॉरिटी जैसे विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं? क्या रसूखदारों के लिए कानून के मायने बदल जाते हैं?

शहर के विकास पर काला धब्बा

सतना जैसे तेजी से बढ़ते शहर में जलनिकासी की समस्या पहले ही चुनौती बनी हुई है। ऐसे में नाले के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ न केवल पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि भविष्य की आपदा को न्योता देना भी है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—क्या अवैध निर्माण पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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