शिक्षा

कलेक्टर के प्रयास से बचा 10वीं के छात्र का भविष्य, परीक्षा में बैठने की मिली अनुमति

सतना। सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के प्रयास से मझगवां विकासखंड स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल नकेला के 10वीं कक्षा के छात्र प्रांशु यादव का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बच गया। विद्यालय स्तर पर हुई लापरवाही के कारण छात्र बोर्ड परीक्षा से वंचित होने की स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिल गई है।

जानकारी के अनुसार प्रांशु यादव (पिता रमेश यादव) ने नियमित परीक्षार्थी के रूप में समय पर विद्यालय में परीक्षा शुल्क जमा कर दिया था। इसके बावजूद उसका परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन दर्ज नहीं किया गया। आरोप है कि संबंधित शिक्षक की गलती से उसका फॉर्म उसी नाम के दूसरे छात्र के नाम से भर दिया गया, जिससे वह परीक्षा सूची में शामिल नहीं हो पाया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रांशु प्रवेश पत्र लेने विद्यालय पहुंचा। नाम सूची में न मिलने पर छात्र और परिजनों ने कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी और माध्यमिक शिक्षा मंडल से तत्काल संपर्क कराया।

प्रशासनिक समन्वय के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने विशेष अनुमति देते हुए प्रांशु को वर्ष 2026 की हाईस्कूल परीक्षा में स्वाध्यायी छात्र के रूप में शामिल होने की मंजूरी दी है। हालांकि इसके लिए 1,200 रुपये का ऑफलाइन परीक्षा शुल्क और 15,000 रुपये का विलंब शुल्क जमा करना होगा। कुल 16,200 रुपये की राशि 14 फरवरी तक जमा की जानी है।

जिला शिक्षा अधिकारी गिरिश अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया है कि चूंकि छात्र ने समय पर फीस जमा कर दी थी, इसलिए जिसकी लापरवाही से फॉर्म समय पर नहीं भरा गया, वही विलंब शुल्क की जिम्मेदारी उठाएगा।

माध्यमिक शिक्षा मंडल की मुख्य विषयों की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू हो रही है। प्रशासन की तत्परता से छात्र का भविष्य तो सुरक्षित हो गया, लेकिन इस घटना ने विद्यालयी प्रबंधन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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