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जीतू पटवारी बोले- कांग्रेस अब घर-घर जाकर छात्रों के करेगी रजिस्ट्रेशन

भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम छात्रों की गूंज ने प्रदेश की कांग्रेस को युवाओं से जुडऩे का नया रास्ता दे दिया है। छात्रों की गूंज को लेकर कांग्रेस अब प्रदेश भर में घर-घर पहुंचेगी। हर घर में युवाओं का रजिस्ट्रेशन कर उनसे संवाद किया जाएगा। युवाओं की समस्याओं को एकत्रित किया जाएगा। प्रदेश भर में इन पर समाज के हर वर्ग में चर्चा करने के बाद सरकार से सवाल किए जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में मीडिया से चर्चा में यह बात कही। राहुल के कार्यक्रम की सफलता से गदगद प्रदेश कांग्रेस के तमाम नेताओं ने छात्रों की गूंज में उमड़े लोगों का आभार जताया है। साथ ही भाजपा और राच्य सरकार द्वारा पूरे कार्यक्रम को झूठ की गूंज बताने पर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने कहाकि कार्यक्रम में आए छात्रों और अभिभावकों के सवालों को तो कम से कम झूठा नहीं बताया जाना चाहिए। युवाओं के भविष्य से जुड़े भर्ती और परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता जरूरी है तथा सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों के सवालों का जवाब देना चाहिए। पटवारी ने बताया कि अब इस कार्यक्रम को कांग्रेस प्रदेश भर में लेकर जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और उन्हें एकत्रित कर शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि छात्रों की समस्याओं को संगठित तरीके से सरकार और समाज के सामने रखा जाए। पीसीसी चीफ ने कहा कि छात्रों की गूंज कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है, हम कोई विवाद भी कार्यक्रम की संख्या को लेकर नहीं चाहते। यह छात्रों और युवाओं की भावनाओं की गूंज है। हमारा उद्देश्य छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार, समाज और युवाओं के बीच एक सकारात्मक और सार्थक बहस को आगे बढ़ाना है। केजी से पीजी तक किफायती, भ्रष्टाचार मुक्त और रोजगारपरक शिक्षा की छात्रों का अधिकार होना चाहिए।
सरकार शिक्षा पर चर्चा करे
पीसीसी चीफ ने कार्यक्रम को झूठ की गूंज बताए जाने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रदेश में शिक्षकों की कमी क्यों है? एक-शिक्षक वाले स्कूलों की स्थिति पर सरकार चर्चा क्यों नहीं करती? सरकारी विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के मुद्दे पर सरकार जवाब क्यों नहीं देती ? ढाई लाख से अधिक शिक्षकों की कमी है, सरकारी विवि में 80 से 90 प्रतिशत तक पद रिक्त, बड़ी संख्या में बच्चों के 12वीं तक शिक्षा पूरी नहीं कर पाने और कॉलेज तक नहीं पहुंच पाने जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा आवश्यक है। भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच एवं रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

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