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यूपीआई शुल्क बढऩे से चिंतित ट्रांसपोर्टर

भोपाल। सब्जियों और अनाज से लेकर औद्योगिक सामान और निर्माण सामग्री तक सडक़ मार्ग से होने वाली ढुलाई पर यूपीआई के नए मर्चेंट चार्ज का असर पड़ सकता है। मध्यप्रदेश के ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर बड़े यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने के बाद कारोबारी डिजिटल भुगतान से बचने लगे तो ट्रकों के संचालन में दिक्कत आ सकती है. इससे सामान की डिलीवरी में देरी और परिवहन लागत बढऩे की आशंका है। प्रदेश में 50 हजार से अधिक ट्रांसपोर्टर हैं और इनके पास अनुमानित 7.5 से 8 लाख व्यावसायिक वाहन हैं। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक तेज और तत्काल भुगतान अब सडक़ परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। चलते वाहन के लिए अचानक खर्च आने पर मालिक या ऑपरेटर तुरंत चालक के खाते में रकम भेज सकता है।
सडक़ पर अचानक आने वाले खर्च में यूपीआई अहम
ट्रक संचालकों के सामने हाईवे पर टायर बदलने, वाहन की मरम्मत, स्पेयर पार्टस खरीदने, ईधन, वर्कशॉप, लोडिंग-अनलोडिंग और अन्य जरूरी खर्च आते रहते हैं। इनमें कई भुगतान दो हजार रुपये से अधिक के होते हैं। ट्रांसपोर्टरों को आशंका है कि ऐसे भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने के बाद दुकानदार और सेवा प्रदाता बड़े यूपीआई भुगतान लेने से बच सकते हैं ने से बच सकते हैं।
25 फीसदी से अधिक भुगतान यूपीआई से
भोपाल की ट्रक ट्रांसपोर्ट ओनर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल पंजवानी के अनुसार परिवहन कारोबार में औसतन 25 फीसदी से अधिक भुगतान अब यूपीआई के जरिए हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रक कई बार मालिक से सैकड़ों किलोमीटर दूर होता है और उसी समय टायर, मरम्मत या किसी स्पेयर पार्ट की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में यूपीआई तत्काल भुगतान का माध्यम उपलब्ध कराता है। एआईएमटीसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर परिवहन से जुड़े यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर हटाने की मांग की है. संगठन ने परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को जीरो-एमडीआर श्रेणी डीआर श्रेणी में शामिल करने का भी आग्रह किया है, खासकर छोटे वाहन मालिकों के लिए।
क्या है नया यूपीआई नियम
संशोधित यूपीआई व्यवस्था के तहत पात्र मर्चेंट भुगतान में दो हजार रुपए से अधिक के लेनदेन पर एमडीआर लागू होगा, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति को किए जाने वाले यूपीआई ट्रांसफर पर शुल्क नहीं लगेगा। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि ईंधन, फास्टैग रिचार्ज, लोडिंग-अनलोडिंग, टायर, ऑटो पार्टस, मैकेनिक और आपात मरम्मत जैसे खर्च परिवहन कारोबार में नियमित रूप से होते हैं। एआईएमटीसी का कहना है कि इन जरूरी भुगतान पर शुल्क से छोटे ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त लागत पड़ सकती है।

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