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परिवहन से होने वाला ध्वनि प्रदूषण बिगाड़ रहा स्वास्थ्य

भोपाल। राजधानी में सुगम बस परिवहन सेवा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश में प्रदूषण के लिए वाहनों की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी को मंच से स्वीकार किया है। वहीं राजधानी की बात करें तो, यहां हर साल बढ़ती वाहनों की संख्या की वजह से ध्वनि और वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। वर्तमान में शहर की सडक़ों पर 21 से लेकर 23 लाख दो और चार पहिया वाहनों का दबाव है, जो शहर के बढ़ते प्रदूषण में 40 फीसदी से भी ज्यादा की हिस्सेदारी निभा रहा है। खासतौर पर ठंड के मौसम में इसकी वजह से प्रदूषण की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। पीएम 2.5 जिसका स्तर 200 से नीचे होना चाहिए। ठंड के मौसम में पिछले साल ही दिसंबर में शहर के कई क्षेत्रों में 300 और इससे ऊपर भी पहुंच गया था। जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। हैरत की बात यह है कि वाहनों की इस बढ़ती संख्या को देखते हुए 5 साल पहले 2021 में ही प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कार्य योजना तैयार की गई थी लेकिन, उस पर प्रभावी अमल आज तक नहीं हो सका।
9 साल में बढ़ गए 11 लाख वाहन
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी में करीब 9 साल में ही 11 लाख से ज्यादा वाहनों की संख्या बढ़ गई है। 2017 में जहां शहर में कुल वाहनों की संख्या 10 लाख थी वहीं, 2018 में 12 लाख 19 में 14 लाख, 2020 में 15 लाख और 2021 में 16 लाख हो गई। इसके बाद 2021 से 2025 तक हर साल औसतन 1 लाख वाहनों का इजाफा शहर की कुल वाहन संख्या में होता रहा, जिसके चलते यह संख्या अब 20 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है, और इस साल के अंत तक यह 21 लाख से ज्यादा हो जाएगी।
जो करने थे उपाय वो नहीं हुए
वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से राजधानी में साल दर साल बढ़ते ध्वनि और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए 2021 में ही एक्शन प्लान तैयार किया गया था। जिसके तहत 15 साल पुराने वाहनों को सख्ती से सडक़ों से हटाना, पीयूसी संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करना, ट्रैफिक सिगनलों का सिंक्रोनाइजेशन तथा अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले डीजल वाहनों पर सख्त कार्रवाई जैसी बातें शामिल थीं। लेकिन इनमें से किसी पर भी पिछले पांच सालों में ठीक से अमल नहीं हुआ जिसके कारण वाहनों की वजह से प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
दूसरे राज्यों और शहरों के दो लाख वाहनों का भी बोझ
राजधानी में मौजूद लाखों वाहनों के अलावा दूसरे राज्यों और शहरों से भोपाल आने वाले वाहनों का असर भी शहर की अबोहवा पर पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक हर महीने करीब 2 लाख ऐसे वाहनों की आवाजाही शहर में होती है। इनमें निजी कमर्शियल और भारी मालवाहक वाहन भी शामिल हैं।
उम्र के हिसाब से वाहनों की संख्या
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में 15 साल या उससे ज्यादा पुराने करीब 2 लाख दो और चार पहिया वाहन है, जिनमें पुराने सरकारी वाहन भी शामिल हैं। वही 10 साल पुराने वाहनों की संख्या 7 से 8 लाख के करीब है। जबकि 5 साल पुराने वाहनों की संख्या पांच लाख के करीब है।

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