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सहारा श्री इतने बेसहारा थे

सतना। एक ऐसी कंपनी जो गोरखपुर में पैदा हुई और उसके बाद देश के हर गली कूचे में लोगों की जुबान पर आ गई उसका नाम था सहारा। सहारा कंपनी को जन्म दिया था सुब्रत राय ने अभी उनकी कुछ दिनों पहले ही बीमारी के कारण मृत्यु हो गई लेकिन उनके अंतिम संस्कार में उनकी पत्नी और उनके दो बेटे भी नहीं आए। अंतत: सुब्रत राय को उनके पोते ने मुखाग्नि दी। अब यहां पर यह सवाल उठता है कि आखिरकार सुब्रत राय ने इतना बड़ा आर्थिक साम्राज्य अपने घर परिवार के लिए खड़ा किया और उनके अंतिम संस्कार में उन्हीं के घर के नजदीकी लोग शामिल नहीं हुए। हजारों करोड़ों रुपए का जिसके लिए साम्राज्य बनाया, जेल गए वह ही दूर हो गए। आखिर इतनी हाय तौबा किसके लिए? सहारा श्री की अंतिम क्रिया में नहीं शामिल हुए उनके दोनों पुत्र। पत्नी भी नहीं आईं। यह सिर्फ खबर भर नहीं है। यह आईना है जीवन का जिसमें हमें और आपको अपनी छवि गौर से देखनी चाहिए।
सुब्रत रॉय अर्थात् सहारा बीते दिनों पंचतत्व में विलीन हो गए । उनके पोते ने उन्हें मुखाग्नि दी । उनके अंतिम क्रिया के वक्त उनके हजारों शुभचिंतक नजर आये । उनके मित्र, स्टॉफ, राजनेता से लेकर फिल्मी दुनिया की हस्तियां तक…अगर कोई उनकी अंतिम यात्रा के वक्त नहीं दिखे तो वे थीं उनकी पत्नी और उनके दोनों बेटे। उनकी मौत के वक्त भी उनके परिवार का कोई सदस्य उनके पास नहीं था। पत्नी और बेटे तक नहीं। यह वही सहारा श्री थे जिनके कारोबार की धाक कभी पूरी दुनिया भर में फैली थी। चिट फण्ड, सेविंगस फाइनेंस, मीडिया, मनोरंजन, एयरलाइन, न्यूज़, होटल, खेल, भारतीय क्रिकेट टीम का 11 साल तक स्पान्सर, वगैरह वगैरह…ये वही सहारा श्री थे जिनकी महफिलों में कभी राजनेता से लेकर अभिनेता और बड़ी बड़ी हस्तियां ठुमके लगाते और दुम हिलाते नजर आते थे… यह वही सहारा श्री थे जिनकी महफिलों में तमाम नेता कालीन की तरह बिछे रहते थे ये वही सहारा श्री थे जिन्होंने अपने बेटे सुशान्तो-सीमांतो की शादी में 500 करोड़ से भी अधिक खर्च किए थे।
ऐसा भी नहीं था कि सहारा श्री ने अचानक दम तोड़ा! उन्हें कैंसर था और उनके परिवार के हरेक सदस्य को उनकी मौत का महीना पता होगा लेकिन तब भी अंतिम वक्त में उनके साथ, उनके पास परिवार का कोई सदस्य नहीं था। बेटों ने उनके शव को कांधा तक नहीं दिया। तो, यही सच्चाई है जीवन की। जिनके लिए आप जीवन भर झूठ-सच करके कंकड़-पत्थर जमा करते हैं। जिनके लिए आप जीवन भर हाय-हाय करते रहते हैं। जिनकी खुशी के लिए आप दूसरों की खुशी छीनते रहते हैं। जिनका घर बसाने के लिए आप हजारों घर उजाड़ते हैं। जिनकी बगिया सजाने और चहकाने के लिए आप प्रकृति तक की ऐसी तैसी करने में बाज नहीं आते…वे पुत्र और वह परिवार आपके लिए, अंतिम दिनों में साथ तक नहीं रह पाते!
कभी ठहरकर सोचिएगा कि आप उल्टा सीधा करके जो पूंजी जमा करते हैं, उन्हें भोगने वाले आपके किस हद तक अपने हैं? अमिताभ से लेकर आडवाणी तक और मुलायम से लेकर ठाकरे तक, सुब्रत रॉय ने अपने दोनों लडक़ों की शादी में पूरे देश का व्हीव्हीआईपी किया था? 2004 में पाँच सौ करोड़ की ये शादी सबसे महँगी मानी गयी थी। और आज कऱीब दो दिन इंतज़ार करने के बाद उनकी चिता में पौत्र ने मुखाग्नि दी। विदेश में बैठे दोनों बेटों ने पिता की मृत्यु पर पहुँचने में असमर्थता जता दी।

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