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दतिया उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत

भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान में अब केवल तीन दिन शेष हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा की ओर से केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री चुनाव प्रचार में जुटे हैं, जबकि कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ पंचायत समितियों के माध्यम से घर-घर संपर्क अभियान तेज कर दिया है। रविवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दतिया के बसई में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर वादाखिलाफी और जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की उनकी अपनी पार्टी में ही कोई पूछ-परख नहीं है, ऐसे में वह जनता का भला कैसे कर सकते हैं।
शिवराज ने कहा कि वर्ष 2003 से पहले कांग्रेस शासन के दौरान ग्वालियर-चंबल अंचल में डकैतों का आतंक था और लोग शाम के बाद घरों से निकलने से डरते थे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ और प्रदेश विकास की राह पर आगे बढ़ा। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल में बदहाल सड़कों और बिजली संकट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने मध्यप्रदेश को विकास की नई दिशा दी है। सभा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक ने पिछले ढाई वर्षों में क्षेत्र के विकास पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा जनादेश का सम्मान किया है और कभी भी विकास कार्यों में राजनीतिक भेदभाव नहीं किया।
खंडेलवाल ने साधा सामाजिक समीकरण
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी रविवार को दतिया में कई बैठकों में भाग लिया। उन्होंने परिहार समाज के प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सभी वर्गों और समाजों को साथ लेकर विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। उन्होंने उपचुनाव में भाजपा को समर्थन देने के लिए समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाएं सभी वर्गों के समग्र विकास के लिए बनाई गई हैं।
कांग्रेस ने घर-घर संपर्क अभियान किया तेज
दूसरी ओर कांग्रेस ने पहली बार गठित पंचायत समितियों के जरिए बूथ स्तर तक संपर्क अभियान को तेज कर दिया है। पार्टी ने चुनाव के अंतिम दिनों में इन समितियों को घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दतिया में डेरा डाल रखा है। सभी नेता विभिन्न समाजों और समुदायों के प्रमुख लोगों से व्यक्तिगत संपर्क कर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। रविवार को जीतू पटवारी ने डांग, करेरा और सलैया पमार क्षेत्र में जनसंपर्क कर मतदाताओं से मतदान की अपील की। उन्होंने भाजपा पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया। वहीं उमंग सिंघार ने आदिवासी क्षेत्रों में जनसंपर्क कर किसानों, युवाओं, महिलाओं, बेरोजगारों और आदिवासी समाज के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील की। मतदान से पहले के अंतिम तीन दिनों में दोनों प्रमुख दलों ने पूरी चुनावी ताकत मैदान में उतार दी है। अब दतिया उपचुनाव में मतदाताओं का रुझान ही तय करेगा कि सत्ता पक्ष अपनी सीट बचा पाता है या कांग्रेस वापसी करने में सफल होती है।
माइक्रो मैनेजमेंट का महासंग्राम
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों का भी बन गया है। दोनों दल अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा वोट बैंक होने के कारण चुनावी रणनीति का केंद्र बना हुआ है। दतिया विधानसभा सीट लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है। हालांकि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस सीट को कांग्रेस से छीनकर भाजपा के खाते में डाला था, लेकिन अगले चुनाव में कांग्रेस ने फिर जीत हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। अब उपचुनाव में भाजपा एक बार फिर इस सीट पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल स्वयं चुनावी रणनीति की कमान संभाले हुए हैं। पार्टी की कोशिश सामान्य वर्ग के साथ-साथ पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की है।
पिछड़ा वर्ग बना सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर
दतिया विधानसभा में करीब दो लाख मतदाता हैं। इनमें पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख नौ हजार है, जो कुल मतदाताओं का 50.7 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति के मतदाता 23.8 प्रतिशत, सामान्य वर्ग 17.6 प्रतिशत, मुस्लिम मतदाता 4.4 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के मतदाता 2.9 प्रतिशत हैं। इन्हीं सामाजिक समीकरणों को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने अभियान की दिशा तय की है।

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