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मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा का नया मॉडल

भोपाल। मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा को रोजगार और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब छात्रों की पढ़ाई पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, साइबर फ्रॉड, जलवायु परिवर्तन, फोरेंसिक साइंस, डिजिटल स्किल्स, स्टार्टअप और उद्योगों की जरूरतों से जुड़े विषयों का अध्ययन कराया जाएगा। साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 6 से कॉमर्स शिक्षा को भी चरणबद्ध तरीके से जोडऩे की तैयारी की जा रही है।
भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में उच्च शिक्षा विभाग ने आईआईटी, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, भारतीय मौसम विभाग, एएमपीआरआई, आईआईएफएम सहित 30 प्रमुख संस्थानों के साथ समझौता (एमओयू) किया। इन एमओयू का उद्देश्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को राष्ट्रीय स्तर के शोध एवं तकनीकी संस्थानों से जोडऩा है, ताकि पाठ्यक्रम केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहकर भविष्य की तकनीकों और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए जा सकें। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी एवं साइबर फ्रॉड, फोरेंसिक साइंस, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, डिजिटल स्किल्स, स्टार्टअप एवं उद्यमिता और उद्योग आधारित कौशल जैसे विषयों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा।
शोधार्थियों को मिलेगा मौसम विभाग का डेटा
समझौते के तहत पहली बार प्रदेश के शोधार्थियों को भारतीय मौसम विभाग से सीधे मौसम और जलवायु संबंधी डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जलवायु परिवर्तन, कृषि, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संबंधी शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए कौशल, रोजगार और संस्कार आधारित शिक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विश्वविद्यालयों को उद्योगों की मांग के अनुरूप नए पाठ्यक्रम विकसित करने चाहिए। सभी संस्थानों में प्रभावी प्लेसमेंट व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। स्थानीय उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार अनुसंधान और कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति को बताया परिवर्तनकारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को नैतिक मूल्यों के साथ आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य किया है और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है।
भारतीय ज्ञान परंपरा भी होगी पाठ्यक्रम का हिस्सा
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को भी पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार और रोजगार क्षमता विकसित करना भी है।
जलवायु परिवर्तन हर क्षेत्र की चुनौती
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और अर्थव्यवस्था सहित प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इसलिए शोधार्थियों को मौसम विभाग का वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण पहल है।

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