एफएसएल की 5 साल की 20 प्रतिशत रिपोर्टों की होगी रैंडम जांच

भोपाल। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए पिछले पांच वर्षों में तैयार डीएनए और अन्य वैज्ञानिक रिपोर्टों में से 20 प्रतिशत रैंडम सैंपलों की स्वतंत्र जांच कराने के आदेश दिए हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की विशेष पीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर प्रदेश के बाहर के तीन वैज्ञानिक अधिकारियों की समिति गठित कर जांच कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
सुनवाई के दौरान एफएसएल की प्रभारी डायरेक्टर डॉ. हर्षा सिंह ने अदालत में स्वीकार किया कि जांच रिपोर्ट में हुई त्रुटि कट-पेस्ट की वजह से हो सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि वैज्ञानिक रिपोर्टों में इस प्रकार की लापरवाही संभव है, तो डीएनए क्रोमोसोम मिलान जैसे अत्यंत संवेदनशील परीक्षणों में भी गंभीर त्रुटियों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि एक मामला सामने आया है तो यह जानना जरूरी है कि कहीं ऐसे अन्य मामले भी तो नहीं हैं।
वैज्ञानिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल
पीठ ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्टें अदालतों में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य होती हैं। यदि उनमें इस तरह की गलतियां होती हैं तो इससे पूरी फोरेंसिक जांच प्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण पिछले पांच वर्षों की रिपोर्टों में से 20 प्रतिशत रैंडम सैंपलों की पुनः जांच कराने का निर्णय लिया गया।
विशेषज्ञ को ही बनाया जाए डायरेक्टर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रभारी डायरेक्टर डॉ. हर्षा सिंह से उनकी शैक्षणिक योग्यता के संबंध में भी सवाल किए। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका शैक्षणिक विषय बायोलॉजी या बायोकेमिस्ट्री नहीं है। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि एफएसएल के डायरेक्टर पद पर फोरेंसिक साइंस, बायोलॉजी या बायोकेमिस्ट्री जैसे संबंधित विषयों के विशेषज्ञ की नियुक्ति पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि वैज्ञानिक जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। यह आदेश नर्मदापुरम जिले के साकेत (इटारसी) निवासी पंकज कुमार बिंदोलिया द्वारा दायर अपील की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत अब गठित समिति की जांच रिपोर्ट और राज्य सरकार की कार्रवाई की समीक्षा 14 अगस्त को करेगी।




