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मध्यप्रदेश में ऑफलाइन भी होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा

भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह और खेल मंत्री विश्वास सारंग भी विशेष रूप से मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, आज दुनिया भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। दुनिया भर में मची उथल-पुथल के बीच पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारा देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के हित में बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने घोषणा की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पहली बार आयोजित होने जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी आयोजित करने का निर्णय लिया है। जिससे दूर-दराज के शिक्षकों को सहूलियत मिलेगी।
कक्षाओं में बनती है देश की किस्मत
सीएम ने कहा- आज शिक्षक दिवस के अवसर पर मैं देश और समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को नमन करता हूं। जहां गुरुर समाप्त होता है, वहीं गुरु की प्राप्ति होती है। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। सीएम ने शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश का भविष्य स्कूल की कक्षाओं में ही गढ़ा जाता है और शिक्षक उन कक्षाओं के निर्माता हैं। एक गुरु को सबसे बड़ी खुशी तब मिलती है जब उसका शिष्य उससे भी आगे निकल जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि तब होती है, जब उसका विद्यार्थी उससे आगे बढक़र सफलता हासिल करे। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा, जहां गुरुर खत्म होता है और जहां से गुण शुरू होता है, वहीं गुरु खड़ा होता है।” शिक्षक देश की दिशा और भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्यपाल बोले- शिक्षा में इनोवेशन जरूरी
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों के अनुरूप शिक्षा में लगातार अपडेट और इनोवेशन जरूरी है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ जोडक़र तकनीकी शिक्षा को नई पहचान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है। कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारें खत्म होनी चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने और आगे बढऩे का अवसर मिलना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि बच्चों के संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की जिम्मेदारी केवल शिक्षकों पर नहीं छोड़ी जा सकती। इसकी शुरुआत घर से होती है।
सरकारी स्कूलों का बेहतर प्रदर्शन
सीएम डॉ. मोहन याव ने कहा- मध्यप्रदेश बोर्ड परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों के शानदार प्रदर्शन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरिट सूची में आधे से अधिक छात्र सरकारी विद्यालयों के होते हैं। यह हमारे शिक्षकों के समर्पण और मेहनत का सीधा प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने, शिक्षकों को सम्मान देने और हर विद्यार्थी के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
राष्ट्रपति मप्र के 6 शिक्षकों को किया सम्मानित
इधर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक दिवस के अवसर पर नेशनल टीचर आवर्ड-2026 के अंतर्गत आयोजित समारोह में देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले छह शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में डॉ. अर्चना शुक्ला, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, रीना गुप्ता और ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं। वहीं सीएम डॉ. मोहन यादव ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना मध्यप्रदेश के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है।

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