भोपाल समेत देशभर में 35 हजार करोड़ से अधिक का व्यापार

भोपाल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उत्सव से राजधानी भोपाल सहित देशभर के बाजार गुलजार रहे हैं। बाजारों में जन्माष्टमी को लेकर खरीदारी का उत्साह चरम पर नजर आया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़ी सामग्री की मांग बढऩे से कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं। व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर के बाजारों में 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार हुआ। जबकि विशेषज्ञ भोपाल में पूजा सामग्री, मिठाई, फल और विशेष रूप से डेयरी उत्पादों (दूध, दही, माखन, पनीर) का 20 करोड़ रुपए से अधिक के व्यापार होना बताया।
माखन-मिश्री, दही और पनीर की बड़ी बिक्री
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय माने जाने वाले माखन-मिश्री और दही की मांग में खासा इजाफा देखने को मिला। घरों और मंदिरों में भोग लगाने के लिए लोग दूध और डेयरी उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं। पनीर समेत अन्य डेयरी उत्पादों की बिक्री में भी तेजी रही। जन्माष्टमी के बाजार में लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और विशेष पोशाके लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। दुकानों पर कान्हा की पोशाकों की अलग-अलग डिजाइन और रंगों में बड़ी रेंज उपलब्ध रही। बच्चों के लिए कृष्ण की पोशाकों की भी अच्छी मांग रही।
फूल-मालाएं सजावटी सामान और कान्हा के झूलों की हुई खरीदारी
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए घरों और मंदिरों की सजावट को लेकर भी लोगों ने जमकर खरीदारी की। पूजन सामग्री, फूल-मालाएं, सजावटी सामान और कान्हा के झूलों की मांग बढ़ी। आकर्षक डिजाइन वाले झूले और पालने लोगों की पसंद बने। उल्लेखनीय है कि जन्माष्टमी के चलते शहर के प्रमुख बाजारों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। बाजारों में धार्मिक आस्था के साथ खरीदारी का उत्साह भी दिखाई दिया। बाजारों की यह रौनक त्योहारी सीजन की मजबूत शुरुआत का संकेत दे रही है।
इधर, कैट द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, जन्माष्टमी से जुड़े व्यापार में प्रमुख हिस्सेदारी मिठाई, माखन-मिश्री एवं डेयरी उत्पादों की 20 फीसदी, पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत एवं पूजन किट की 10 फीसदी, फूल, मालाएं एवं सजावट सामग्री की 12 फीसदी, पारंपरिक परिधान एवं वस्त्रों की 10 फीसदी, फल, सूखे मेवे एवं प्रसाद सामग्री की 10 फीसदी, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, झूलों एवं श्रृंगार सामग्री की 8 फीसदी, उपहार, खिलौने एवं घरेलू सजावटी सामग्री की 5 फीसदी, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन एवं अन्य सेवाओं की 15 फीसदी तथा अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की 10 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है।
भारतीय त्योहारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें होने वाला खर्च केवल उपभोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों तक आय और रोजगार के रूप में पहुंचता है। यही प्रक्रिया भारत की जमीनी, समावेशी और विकेंद्रीकृत सनातन अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, मुंबई, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर तथा देश के अन्य प्रमुख कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
मखाना राजगीरा, सेंधा नमक और सूखे मेवे की खरीदारी
जन्माष्टमी पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, मखाना, राजगीरा, सेंधा नमक और सूखे मेवे की खरीदारी की। वहीं पूजा के लिए फूल, माला, तुलसी, पंचामृत सामग्री, धूप, दीप, कपूर और अन्य पूजन सामग्री की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ रही। वहीं फलाहार के लिए केला, सेब, अंगूर, अनार सहित अन्य फलों की खरीदारी हुई है। पूजा सामग्री की दुकानों पर रोली, अक्षत, चंदन, धूप, अगरबत्ती, कपूर, कलावा, गंगाजल, फूल-माला, तुलसी दल और पंचामृत की सामग्री की बिक्री हुई है।




