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चित्रकूट में जनजीवन तेजी से सामान्य होने की ओर, राहत और पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

सतना। चित्रकूट में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद जनजीवन अब तेजी से सामान्य स्थिति की ओर लौटने लगा है। बाढ़ के दौरान जिन सडक़ों पर करीब दो फीट तक गाद और मलबा जमा हो गया था, वहां अब सफाई के बाद आवागमन और चहल-पहल शुरू हो गई है। जिला प्रशासन की टीमें पिछले कई दिनों से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहकर राहत, सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य, भोजन एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के कार्य में जुटी हुई हैं। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह, सीईओ जिला पंचायत शैलेंद्र सिंह, एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी चित्रकूट में रहकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के साथ-साथ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत व्यवस्थाओं को शीघ्र बहाल करना है। बाढ़ के बाद मुख्य मार्गों की सफाई का कार्य तेजी से पूरा करने के बाद अब नगर निगम सतना, नगर परिषदों एवं जनपद पंचायतों से आए अमले द्वारा चित्रकूट की गलियों और प्रभावित घरों में जमा मलबे एवं कचरे को हटाया जा रहा है। गऊघाट मार्ग, पुराने लंका तिराहा, पुरानी तहसील के आसपास सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। भरत घाट क्षेत्र में भी मशीनरी एवं ट्रैक्टरों की मदद से मिट्टी और मलबा हटाया जा रहा है। चित्रकूट नगर के प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान को युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है, ताकि बाढ़ के बाद संक्रमण और जलजनित बीमारियों की आशंका को कम किया जा सके। सफाई के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिडक़ाव कराया जा रहा है। नयागांव सहित विभिन्न क्षेत्रों में दवा डालने और सैनिटाइजेशन का कार्य जारी है।
स्वच्छता के साथ शुद्ध पेयजल उपयोग करने की अपील
प्रशासन द्वारा लोगों को स्वच्छता बनाए रखने और सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। चित्रकूट नगर के प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल के कैंपर वितरित किए जा रहे हैं। लसूरिया एवं आसपास के डूब प्रभावित क्षेत्रों में भी पेयजल के लिए कैंपर तथा आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। हैंडपंपों में जर्मेक्स एवं क्लोरीनेशन की प्रक्रिया लगातार जारी है। कार्यपालन यंत्री श्वेतांक चौरसिया की उपस्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हैंडपंपों में जर्मेक्स डालकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के उपयोग के संबंध में समझाइश दी गई। ग्राम पंचायत किचवरिया जनपद पंचायत रामपुर बघेलान में हैंडपंपों का क्लोरीनेशन किया गया तथा ग्रामीणों को जागरूक किया गया। ग्रामीणों की मांग पर कुओं में डालने के लिए जर्मेक्स भी उपलब्ध कराया गया। ग्राम पंचायत झरी, जैतवारा में भी जल जागरूकता एवं क्लोरीनेशन का कार्य किया गया। चित्रकूट में हनुमान धारा रोड पुल के समीप जल आवर्धन योजना के इंटेक वेल की पाइप चोक होने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई थी। पाइप को क्लियर करने और व्यवस्था को सुचारु करने के लिए सुधार कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य में एनडीआरएफ टीम की भी मदद ली जा रही है।
राहत सामग्री का व्यवस्थित भंडारण और वितरण
चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए विभिन्न स्थानों से राहत सामग्री लगातार प्राप्त हो रही है। प्रशासन ने कंपनियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों एवं आमजन से प्राप्त सामग्री को एक स्थान पर सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने के लिए कामतानाथ जी के पास वन विभाग के बड़े गोदाम को संग्रहण केंद्र के रूप में चिन्हित किया है। यहां प्राप्त राहत सामग्री को आवश्यकता के अनुसार व्यवस्थित कर प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। कलेक्टर डा सतीश कुमार एस के निर्देश पर अपर कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि उपलब्ध सामग्री का अधिकतम लाभ वास्तविक प्रभावित परिवारों तक पहुंच सके। सद्गुरु, डीआरआई, दीनदयाल रसोई, संतोषी अखाड़ा, आचार्य आश्रम सहित विभिन्न संस्थाएं भी राहत एवं सेवा कार्यों में सहयोग कर रही हैं। जन अभियान से जुड़े स्वयंसेवक भी राहत कार्यों में प्रशासन के साथ जुटे हुए हैं। नगर परिषद चित्रकूट के दूरस्थ मोहल्ले बटोही तथा सती अनुसूइया क्षेत्र के कुल 62 परिवारों को प्रारंभिक राहत के रूप में कंबल, आलू, मोमबत्ती, माचिस, सूखे कपड़े एवं स्नैक्स वितरित किए गए। प्रशासन का प्रयास है कि मुख्य शहर के साथ-साथ दूरस्थ और प्रभावित बस्तियों तक भी राहत सामग्री समय पर पहुंचे। बाढ़ प्रभावितों के लिए संचालित राहत रसोई में भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नगर परिषद एवं जिला प्रशासन के सहयोग से तैयार भोजन को प्रभावितों तक भेजने से पहले अधिकारी स्वयं भोजन की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। गुणवत्ता एवं स्वच्छता की पुष्टि के बाद ही भोजन के पैकेट वितरण के लिए भेजे जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित परिवारों तक खराब अथवा अस्वच्छ भोजन नहीं पहुंचना चाहिए। भोजन की गुणवत्ता की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए आने वाली संस्थाओं एवं समाजसेवियों से प्रशासन ने अपील की है कि दूर से तैयार किया हुआ पका भोजन लाकर सीधे वितरित न करें। लंबे समय तक परिवहन के कारण पका हुआ भोजन खराब होने की संभावना रहती है। प्रशासन ने अपील की है कि यदि कोई संस्था या व्यक्ति बाहर से पका हुआ भोजन लेकर आता है तो पहले स्थानीय प्रशासन को सूचित करे और भोजन की गुणवत्ता की जांच के बाद ही उसका वितरण किया जाए। इसके स्थान पर सूखा खाद्यान्न अथवा अन्य खाद्य सामग्री स्थानीय राहत रसोई को उपलब्ध कराना अधिक उपयोगी होगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नगर परिषद एवं जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए जा रहे भोजन के पैकेट पॉलीथिन में पैक नहीं किए जा रहे हैं।
गर्भवती महिला को सुरक्षित पहुंचाया अस्पताल
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से गर्भवती महिला के संबंध में गंभीर सूचना प्राप्त होने पर प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। ग्राम पंचायत गाजगामा अंतर्गत ग्राम गढ़वा कला में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा एवं पानी की थैली फटने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग ने तत्काल एम्बुलेंस/चिकित्सा वाहन की व्यवस्था कर महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया और भर्ती कराया। प्रशासन द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक मामलों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।
प्रभावित सडक़ों और जल निकासी व्यवस्था की बहाली
बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त मार्गों की भी मरम्मत एवं बहाली का कार्य जारी है। तहसीलदार ज्योति पटेल एवं सीएमओ पंजाब सिंह की उपस्थिति में जैतवारा-कुलकडिय़ा रोड का निरीक्षण किया गया। खुटहा नहर से रॉ मटेरियल उठवाकर क्षतिग्रस्त हिस्से में सुधार कार्य कराया जा रहा है। जैतवारा-कुलक?िया रोड पर खुटहा-मरवा के बीच करियापानी नाला भी क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसके सुधार की कार्रवाई की जा रही है। इसी प्रकार ग्राम खदोरा में पानी भरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया था। लोक निर्माण विभाग द्वारा सरफेस ड्रेन का कार्य कर पानी की निकासी की व्यवस्था की गई, जिससे आवागमन बहाल करने में मदद मिली। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की सुरक्षा के लिए भी विभागीय टीमें सक्रिय हैं। ग्राम देवलहा, विकासखंड मझगवां में डोर-टू-डोर पशुधन स्वास्थ्य शिविर एवं टीकाकरण का कार्य किया गया। ग्राम चितहरा में भी बाढ़ आपदा राहत एवं टीकाकरण शिविर आयोजित किया गया। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण एवं आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राहत एवं पुनर्वास कार्यों की लगातार निगरानी
चित्रकूट में राहत एवं पुनर्वास कार्यों के साथ-साथ सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य, सडक़, जल निकासी और भोजन वितरण की व्यवस्थाओं को एक साथ गति दी जा रही है। अपर कलेक्टर विकास सिंह, तहसीलदार कमलेश भदौरिया, सीएमओ नगरपालिका अंकित सोनी सहित अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में उपस्थित रहकर कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। सीईओ जिला पंचायत शैलेंद्र सिंह के निर्देशन में भोजन एवं पेयजल वितरण की व्यवस्था संचालित की जा रही है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक आवश्यक राहत पहुंचाने के साथ-साथ चित्रकूट में जनजीवन को जल्द से जल्द पूरी तरह सामान्य किया जा सके। प्रशासन की सक्रियता, विभागों के समन्वित प्रयास और सामाजिक संस्थाओं एवं आमजन के सहयोग से चित्रकूट अब धीरे-धीरे बाढ़ की त्रासदी से उबरते हुए सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है। अतिवृष्टि एवं बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन को सामान्य करने के लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा राहत, साफ-सफाई और पुनर्बहाली के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। चित्रकूट में भरत घाट के पास साफ-सफाई अभियान चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों से गाद, कचरा एवं अन्य अवशेष हटाकर स्वच्छता व्यवस्था बहाल करने का कार्य जारी है। इसी क्रम में सोहावल की ग्राम पंचायत खढ़ौरी में सडक़ मार्ग के रिस्टोरेशन का कार्य कराया जा रहा है। क्षतिग्रस्त सडक़ को आवागमन योग्य बनाने के लिए आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के संविदाकार द्वारा भी बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई गई है। बाढ़ का पानी उतरने पर सभी क्षेत्रों में नुकसानी का संयुक्त सर्वे युद्ध स्तर पर किया जा रहा है।कलेक्टर ने जिले भर में राजस्व अधिकारी कृषि और स्थानीय निकाय के अधिकारियों को शीघ्र नुकसानी सर्वे पूरा कर राहत सहायता वितरित करने के निर्देश भी दिए हैं।

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