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मेट्रो स्टेशन नामकरण नियम में बड़ा बदलाव, केंद्र की परमिशन की बाध्यता खत्म

इंदौर। रेलवे स्टेशन की तरह मेट्रो स्टेशनों के नाम भी एक बार तय होने के बाद बदले नहीं जा सकते थे। गजट नोटिफिकेशन में मेट्रो स्टेशन का जो नाम दर्ज होता था, वो ही तय रहता था। केंद्र सरकार से अनुमति लेने के बाद ही राज्य सरकार नाम बदल सकती थी।
केंद्र सरकार ने अपने नियमों को शिथिल करते हुए मेट्रो स्टेशन के नाम बदलने के लिए राज्य सरकार को अधिकार दे दिए है। ऐसे में अब राज्य सरकारे अपने शहरों में किसी भी मेट्रो स्टेशन का नया नामकरण कर सकेगी। शनिवार को यह जानकारी इंदौर मेट्रो के कार्यक्रम में आए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने मेट्रो के अधिकारियों व शहर के जनप्रतिनधियों को दी।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिया नाम बदलने का सुझाव
गौरतलब है कि इंदौर के जनप्रतिनिधि लंबे समय से मेट्रो के कुछ स्टेशन का नाम देश की वीरांगनाओं के नाम पर रखने की मांग करते आ रहे हैं, ऐसे में इंदौर मेट्रो के पूर्व में तय मेट्रो स्टेशनों के नाम राज्य सरकारों की अनुमति से बदले जा सकेंगे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बापट चौराहे के मेट्रो स्टेशन का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय रखने का सुझाव मेट्रो के अधिकारियों को दिया। ऐसे में अब इस स्टेशन का नाम भी बदलेगा।
नियमों की उलझन में सवा साल बाद भी नहीं बदले गए मेट्रो स्टेशन के नाम
30 मई 2025 को सुपर कारिडोर के 5.9 किलोमीटर हिस्से पर पहली बार मेट्रो का कमर्शियल रन शुरु हुआ था। उस कार्यक्रम के एक दिन पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गांधी नगर स्टेशन का नाम मां अहिल्या मेट्रो स्टेशन व चार अन्य स्टेशन के नाम दुर्गावती, अवंतिका बाई, रानी लक्ष्मीबाई, वीर झलकारी बाई ने नाम पर रखने की घोषणा की थी।

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