आईसर भोपाल में बनेगा नया रिसर्च हब

भोपाल। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर) भोपाल का 52 एकड़ भूमि पर 485 करोड़ की लागत से नया कैंपस, आधुनिक लैब, इनोवेशन पार्क विकसित किया जाएगा। इसका भूमि पूजन शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। उन्होंने मुख्य परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्प अर्पित किए और संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं अनुसंधान गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आईसर के विस्तारित परिसर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय महत्व के उभरते क्षेत्रों में कार्य किया जाएगा। इनमें क्वांटम एवं एडवांस्ड मैटेरियल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल सिस्टम एवं टेक्नोलॉजी, मेडिकल डिवाइसेस एवं डायग्नोस्टिक्स और एआई एवं रोबोटिक्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विज्ञान व नवाचार का आधार बनेगा अत्रि
आईआईएसईआर भोपाल संसद के अधिनियम के तहत स्थापित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। विस्तारित परिसर के माध्यम से संस्थान में अनुसंधान एवं नवाचार की सुविधाओं का विस्तार होगा तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उभरती प्रौद्योगिकियों पर कार्य करने के नए अवसर मिलेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से शोध की परंपरा रही है। वर्तमान दौर में आईसर भोपाल संस्थान नए-नए शोध करते हुए ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अनुसंधान कार्य को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अनेक क्षेत्रों में नवाचारों से विकास को तेज करने में सहायता मिली है। डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जीवन की विशेषता थी कि उन्होंने भारतीय संस्कृति के अनेक पहलुओं से विश्व को अवगत करवाया लेकिन स्वयं को कभी किसी कर्मकांड से नहीं जोड़ा। परमात्मा ने सभी मनुष्यों के लिए जीवन का एक समय निश्चित किया है। हर सांस के साथ हम सभी नया जीवन पाते हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नए आयाम होंगे विकसित
विस्तारित परिसर में प्रस्तावित पांचों टेक्नोलॉजी वर्टिकल से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इन वर्टिकल में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर भी कार्य किया जाएगा। क्वांटम एवं एडवांस्ड मैटेरियल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल सिस्टम एवं टेक्नोलॉजी, मेडिकल डिवाइसेस एवं डायग्नोस्टिक्स और एआई एवं रोबोटिक्स के क्षेत्र में शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को नई तकनीकों पर कार्य करने के अवसर मिलेंगे।




