बढ़ती बिजली मांग के बीच थर्मल बिजलीघरों पर सौर ऊर्जा का ब्रेक

भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन सरकारी ताप विद्युत गृहों का उत्पादन इसके उलट घटता जा रहा है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के वर्ष 2025-26 के उत्पादन आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार थर्मल उत्पादन 2,207 मिलियन यूनिट कम रहा। इसके साथ ही बैकिंग डाउन का आंकड़ा करीब ढाई गुना बढ़ गया है। यह बदलाव स्पष्ट संकेत देता है कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था में सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है और थर्मल बिजली घरों की भूमिका अब बदल रही है। एमपीजेनको के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में सरकारी ताप विद्युत गृहों से 28,789.8 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह घटकर 26,582.8 मिलियन यूनिट रह गया। यानी उत्पादन में 2,207 मिलियन यूनिट अथवा 7.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर बैकिंग डाउन 2,297.8 मिलियन यूनिट से बढक़र 5,645.5 मिलियन यूनिट हो गई, जो लगभग 146 प्रतिशत की वृद्धि है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट बिजली की मांग कम होने का परिणाम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन के स्वरूप में आए बदलाव का संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। दिन के समय सौर ऊर्जा से पर्याप्त बिजली मिलने और मानसून के दौरान जल विद्युत उत्पादन बढ़ने से वितरण कंपनियों को अपेक्षाकृत महंगी थर्मल बिजली कम खरीदनी पड़ी। इसके कारण तकनीकी रूप से उपलब्ध रहने के बावजूद कई ताप विद्युत इकाइयों को कम क्षमता पर चलाना पड़ा या उत्पादन रोकना पड़ा।
तीनों प्रमुख ताप विद्युत गृहों का उत्पादन घटा
एमपीजेनको के तीनों बड़े ताप विद्युत गृहों के उत्पादन में कमी दर्ज की गई। सारनी स्थित सतपुड़ा ताप विद्युत गृह का उत्पादन 3,756 मिलियन यूनिट से घटकर 3,402.3 मिलियन यूनिट रह गया। संजय गांधी ताप विद्युत परियोजना, बिरसिंहपुर का उत्पादन 8,445.2 मिलियन यूनिट से घटकर 7,826 मिलियन यूनिट पर आ गया। वहीं सतपुड़ा सुपर थर्मल पावर स्टेशन, खंडवा का उत्पादन 15,042.6 मिलियन यूनिट से घटकर 13,620.9 मिलियन यूनिट रह गया। यानी प्रदेश के सभी प्रमुख सरकारी ताप विद्युत संयंत्रों में उत्पादन घटा।
अक्टूबर-नवंबर में सबसे ज्यादा पड़ा असर
माहवार विश्लेषण बताता है कि अक्टूबर 2025 में सबसे अधिक बैकिंग डाउन हुई। अक्टूबर 2024 में जहां 2,049.6 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ था, वहीं अक्टूबर 2025 में यह घटकर 1,596.5 मिलियन यूनिट रह गया। इसी अवधि में बैकिंग डाउन 239.9 मिलियन यूनिट से बढक़र 1,572.5 मिलियन यूनिट पहुंच गई, जो पूरे वर्ष का सबसे अधिक स्तर है।
नवंबर में भी यही स्थिति रही। इस महीने बैकिंग डाउन 135.2 मिलियन यूनिट से बढक़र 933.3 मिलियन यूनिट दर्ज की गई।




