एमपी को मूंग खरीद का 87 फीसदी कोटा, अब तक सिर्फ 2 फीसदी खरीदी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की खरीद सीमा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने आ गई है। प्रदेश की मंग खरीद की सीमा बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार की मांग पर केंद्र सरकार ने अपना जवाब दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के मुताबिक, ग्रीष्मकालीन सीजन 2025-26 में देशभर में मूंग खरीद के लिए मंजूर कुल 5.23 लाख मीट्रिक टन मात्रा में से अकेले मध्य प्रदेश को 4.54 लाख मीट्रिक टन से अधिक की मंजूरी दी गई है। यानी राष्ट्रीय स्तर पर मंजूर मात्रा का करीब 87 फीसदी हिस्सा मध्य प्रदेश के खाते में आया है। केंद्र ने इसे अब तक प्रदेश को मिली सबसे बड़ी मूंग खरीद मंजूरी बताया है। साथ ही राज्य सरकार से कहा है कि पहले से मंजूर मात्रा की खरीद तेजी से पूरी कराई जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।
पिछले साल 3.93 लाख टन मूंग खरीदी गई थी: केंद्र के अनुसार, ग्रीष्मकालीन सीजन 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4,19,692 मीट्रिक टन मूंग खरीद की मंजूरी दी गई थी। इसके मुकाबले 3,93,123.79 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हुई। इस खरीद का एमएसपी मूल्य करीब 3,413.10 करोड़ रुपये रहा और 1,22,776 किसानों को इसका लाभ मिला।
सोयाबीन में भी भावांतर योजना का लाभ: केंद्र ने मूंग के साथ सोयाबीन को लेकर भी मध्य प्रदेश को मिली मदद का जिक्र किया है। वर्ष 2025-26 में भावांतर भुगतान योजना के तहत प्रदेश के लिए 22.21 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन की मंजूरी दी गई। इसके लिए केंद्र की ओर से 1,093.13 करोड़ रुपये जारी किए गए। केंद्र के अनुसार, योजना का लाभ 7,10,257 किसानों को मिला है। केंद्र सरकार का कहना है कि एमएसपी व्यवस्था को केवल गेहूं और धान तक सीमित नहीं रखा जा रहा है।
16 जुलाई तक सिर्फ 2 फीसदी मूंग खरीदी
केंद्र को मिले आंकड़ों के अनुसार, 16 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश में 7,947.92 मीट्रिक टन मूंग की ही खरीद हो पाई है। इसमें करीब 12 हजार किसान शामिल हैं। यह मात्रा प्रदेश के लिए मंजूर कुल खरीद सीमा का लगभग 2 फीसदी ही है। केंद्र ने इसी आंकड़े का हवाला देते हुए कहा है कि पहले मौजूदा स्वीकृत सीमा के तहत खरीद पूरी कराई जाए। मंत्रालय के मुताबिक, स्वीकृत मात्रा पूरी होने के बाद यदि अतिरिक्त खरीद की जरूरत रहती है तो नियमों के तहत राज्य के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।




