हिंदू विवाह! धार्मिक रस्मों-अनुष्ठानों का संपन्न होना अनिवार्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल आर्य समाज मंदिर द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र के आधार पर किसी शादी को कानूनी रूप से वैध हिंदू विवाह नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा-हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शादी तभी मान्य होगी, जब विवाह की आवश्यक धार्मिक रस्में और अनुष्ठान पूरी तरह संपन्न किए गए हों। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारी रोहित पांडेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दरअसल, मामला 2007 में रोहित पांडेय और सुचेता तिवारी के बीच हुई शादी से जुड़ा है। सुचेता तिवारी का दावा था कि दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। इस शिकायत के आधार पर एसएसबी ने रोहित पांडेय को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। विभाग का तर्क था कि रोहित ने नौकरी में शामिल होते समय खुद को अविवाहित बताकर गलत जानकारी दी थी। रोहित ने इस शादी को सिरे से खारिज करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने तर्क दिया कि हिंदू विवाह के लिए अनिवार्य धार्मिक रस्में संपन्न होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।




