चौथी बार बुलडोजर की आहट से दहशत में 50 परिवार, प्रशासन–संतों की बैठक के बाद भी संशय बरकरार

धर्मनगरी चित्रकूट में स्थित गौरीहार मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों में इन दिनों गहरी चिंता और असमंजस का माहौल है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन चौथी बार बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी में है, जिससे लगभग 50 घर और करीब 250 लोगों का आशियाना खतरे में पड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, दो दिन पहले प्रशासनिक अधिकारियों और साधु–महंतों के बीच एक अहम बैठक आयोजित की गई थी। बैठक का उद्देश्य मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में मार्ग व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक समाधान तलाशना था।
बताया जा रहा है कि संत–महात्माओं ने सुझाव दिया कि मंदिर के विपरीत दिशा, यानी आम जनता की ओर से रास्ता निकाला जाए।
वहीं दूसरी ओर यह भी तथ्य सामने आया है कि गर्भगृह से दूर सड़क की ओर बने मंदिर के कुछ कमरे अतिक्रमण की श्रेणी में बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई किस पर होगी—मंदिर के कमरों पर या आम लोगों के मकानों पर?
जनता की पीड़ा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर उनके घर टूटते हैं तो वे खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे। अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी या छोटे-मोटे व्यवसाय पर निर्भर हैं। “अगर घर चला गया तो बच्चों की पढ़ाई, रोज़गार और जीवन सब कुछ खत्म हो जाएगा,” एक स्थानीय निवासी ने आशंका जताई। लोगों का तर्क है कि यदि मंदिर के सड़क की ओर बने कुछ कमरे हटाए भी जाते हैं, तो गर्भगृह सुरक्षित रहेगा और धार्मिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन यदि बस्ती उजाड़ी गई, तो 250 से अधिक लोग बेघर हो जाएंगे।
प्रशासन और संतों का पक्ष
बैठक में मौजूद साधु–महंतों ने कथित तौर पर मंदिर की गरिमा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही, लेकिन साथ ही मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह भी किया। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है कि कार्रवाई किस दिशा में होगी।
बड़ा सवाल
एक तरफ मंदिर परिसर के कुछ कमरे, दूसरी तरफ 50 घरों की छत।
क्या प्रशासन न्यूनतम नुकसान के सिद्धांत पर निर्णय लेगा?
क्या पुनर्वास की व्यवस्था पहले की जाएगी?
या फिर एक बार फिर बुलडोजर चलेगा?
निष्कर्ष
चित्रकूट में यह मामला अब सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि आस्था और आजीविका के बीच संतुलन का बन चुका है। स्थानीय लोग प्रशासन से पारदर्शी निर्णय और पुनर्वास की स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन क्या रुख अपनाता है—मंदिर के कमरों पर कार्रवाई या आम जनता के आशियाने पर बुलडोजर?




