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राजनीति में राजा से रंक बने पुष्पराज

सतना-दिग्विजय सिंह की सरकार में रीवा रियासत के राजा पुष्पराज सिंह मंत्री भी रह चुके लेकिन जब जनता किसी को अपनी निगाह से उतरती है ना तो उसे राजा मानती है और ना ही उसे नेता । पुष्पराज सिंह के साथ भी कुछ इसी तरीके की कहानी जुड़ी है । रीवा राजघराने के राजकुमार पुष्पराज सिंह 1998 में कांग्रेस की टिकट पर 38194 वोट लेकर अंतिम बार विजई हुए थे । पुष्पराज सिंह ने आज की तारीख में भारतीय जनता पार्टी के काद्यावर नेता राजेंद्र शुक्ला को चुनाव हराया था 1998 में राजेंद्र शुक्ला को₹36800 वोट मिले थे । 1998 का चुनाव पुष्पराज सिंह के लिए अंतिम चुनाव था इसी चुनाव में उन्हें अंतिम विजय मिली थी हालांकि इसके बाद कई दलों में गए और चुनाव भी लड़े लेकिन जीत कभी नसीब नहीं हुई । एक तो राजकुमार ऊपर से विधायक के साथ मंत्री होना भी अपने आप में बड़ी बात है लेकिन जब कोई व्यक्ति आम जनता से कटने लगता है जब कोई व्यक्ति अपने आप को सर्वशक्तिमान मानने लगता है जब किसी व्यक्ति को इस बात का अहंकार आ जाता है कि मैं ही सब कुछ तो जनता उसे उसकी औकात बता देती है निश्चित तौर पर 1998 के बाद से पुष्पराज सिंह चुनाव नहीं जीते इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी हालत बहुत बुरी है लेकिन राजनीतिक तौर पर आज की तारीख में उन्हें रीवा जिले की सियासत में कोई भी तवज्जो नहीं मिलती । क्योंकि उन्होंने ना तो वक्त को पहचान और ना ही जानता की खिदमत की वे अपने आप को राजकुमार मानते रहे और जनता से राजकुमार बनकर ही मिलते रहे शायद उन्हें यह नहीं मालूम था कि लोकतंत्र में प्रजा ही राजा है जिसके पक्ष में प्रजा है उसको राजा बना देती है और जिसके पक्ष में प्रजा नहीं है उसे राजा से रंक बना देती है । पुष्पराज सिंह को कांग्रेस पार्टी ने 2003 में भी टिकट दिया था लेकिन पुष्पराज सिंह तीसरे नंबर पर थे 2003 में राजेंद्र शुक्ला को 78612 वोट मिले थे वही बहुजन समाज पार्टी के लेखन सिंह को 224 तथा पुष्पराज सिंह को 21796 वोट मिले थे । पुष्पराज सिंह का राजनीतिक दुर्दिन यही से शुरू हुआ था । बेशक पुष्पराज सिंह राजनीति के पुराने खिलाड़ी रहे होंगे लेकिन आधुनिक राजनीति को वह पहचान नहीं पाए बल्कि पुष्पराज सिंह के पुत्र दिव्यराज सिंह ने मौके की नजाकत को भला और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम के सिरमौर विधानसभा से चुनाव लड़ा दिव्यराज सिंह सिरमौर विधानसभा से दो बार लगातार विधायक चुने जा रहे हैं । रीवा जिले के अंदर भारतीय जनता पार्टी का माहौल देखते हुए पुष्पराज सिंह ने एक बार फिर शिवराज सिंह और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा के उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है उम्मीद कम ही है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी कहीं से कोई टिकट देगी लेकिन अगर प्रदेश के अंदर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है तो भारतीय जनता पार्टी के सदस्य नाते पुष्पराज सिंह 2023 में अपनी फीकी दुकान को चमकती हुई दुकान में तब्दील कर सकते हैं। रीवा जिले की सियासत में आज की तारीख में पुष्पराज सिंह का कोई वर्चस्व और कोई वजूद नहीं है । लेकिन पूर्व मंत्री और रीवा रियासत के राजकुमार होने के नाते पुष्पराज सिंह मंच की शोभा तो बड़ा ही सकते हैं।

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