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नसबंदी के एक साल बाद महिला ने चौथे बच्चे को दिया जन्म, जिला अस्पताल की लापरवाही उजागर

अस्पताल की कार्यप्रणाली कटघरे

सतना। परिवार नियोजन को बढ़ावा देने वाली सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब सतना जिला अस्पताल में कराई गई नसबंदी के एक साल बाद ही एक महिला ने चौथे बच्चे को जन्म दे दिया। नसबंदी फेल होने का यह मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग से न्याय और मुआवजे की मांग की है, वहीं अस्पताल की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है।
शहर के सिद्धार्थ नगर बढ़ईया टोला निवासी नंदकिशोर बुनकर की 29 वर्षीय पत्नी फूलकुमारी की नसबंदी 23 दिसंबर 2024 को सतना जिला अस्पताल में कराई गई थी। तीन बच्चों के बाद दंपती ने यह निर्णय लिया था कि अब परिवार पूरा हो चुका है, लेकिन करीब एक साल के भीतर ही महिला के फिर से गर्भवती होने की जानकारी ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

रीवा में सोनोग्राफी से हुआ खुलासा
करीब छह महीने पहले फूलकुमारी की तबीयत बिगडऩे पर परिजन उन्हें इलाज के लिए रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल लेकर गए। वहां कराई गई सोनोग्राफी जांच में सामने आया कि वह लगभग तीन माह की गर्भवती हैं। नसबंदी के बावजूद गर्भधारण की पुष्टि होने से परिवार सकते में आ गया।

कमजोर हालत के चलते गर्भपात नहीं
रीवा से लौटने के बाद दंपती ने जिला अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को नसबंदी फेल होने की जानकारी दी। नंदकिशोर के अनुसार, नर्सिंग स्टाफ द्वारा गर्भपात की सलाह दी गई थी, लेकिन महिला की शारीरिक कमजोरी को देखते हुए चिकित्सकों ने गर्भ को जारी रखने और प्रसव कराने की सलाह दी।
पीडित परिवार पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर है। नंदकिशोर के अनुसार, उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं—बेटे की उम्र सात वर्ष, जबकि बेटियां चार और दो वर्ष की हैं। इसी वजह से उन्होंने नसबंदी का विकल्प चुना था।

स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू
मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में है और नसबंदी से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि यदि जांच में नसबंदी फेल होने की पुष्टि होती है, तो शासन के नियमों के अनुसार पीड़ित परिवार को हर्जाना प्रदान किया जाएगा।

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