इंदौर जहरीला पानी कांड को बताया ‘नरसंहार’ धवारी चौक पर एकदिवसीय उपवास सत्याग्रह का समापन**

सतना। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीला पानी पीने से हुई मौतों को हादसा नहीं बल्कि नरसंहार बताते हुए शनिवार को धवारी चौक, सतना में एकदिवसीय उपवास सत्याग्रह का आयोजन किया गया। यह उपवास सत्याग्रह शाम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सत्याग्रह में वक्ताओं ने कहा कि भागीरथपुरा में जहरीले पानी की आपूर्ति से कई लोगों की जान चली गई, लेकिन अब तक न तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित परिवारों को न्याय मिला। इसे प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्थागत अपराध बताया गया।
“यह हादसा नहीं, सिस्टम की हत्या है”
उपवास सत्याग्रह के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि— प्रशासन को पहले से दूषित जल आपूर्ति की जानकारी थी
इसके बावजूद जल वितरण बंद नहीं किया गया समय रहते चेतावनी और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई जिसका खामियाजा निर्दोष नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। दोषियों पर कार्रवाई की मांग.
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि—
इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए जल प्रदाय व्यवस्था से जुड़े दोषी अधिकारियों और एजेंसियों पर हत्या का मामला दर्ज हो मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए प्रदेशभर में जल आपूर्ति व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए.
जनता की भागीदारी
उपवास सत्याग्रह में सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सहभागिता रही। लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर
“जहरीला पानी नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए” “हादसा नहीं, जवाबदेही तय करो” जैसे नारे लगाए।
चेतावनी भी दी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर तक ले जाया जाएगा।
भागीरथपुरा की मौतें एक चेतावनी हैं— अगर पानी सुरक्षित नहीं, तो विकास भी बेकार है।




