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मैहर जिले में बांग्लादेशी घुसपैठिया मिलने का शक, प्रशासनिक हलकों में हडक़ंप

दस्तावेज निरस्त, जांच में जुटा प्रशासन

मैहर। असम और पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के मिलने की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं। लेकिन अब मध्यप्रदेश के मैहर जिले में एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जहां पिछले कई वर्षों से एक व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहा था। जैसे ही यह खबर आई कि मुकुंदपुर में अवैध रूप से एक बांग्लादेशी नागरिक रह रहा है, प्रशासनिक हलकों में हडक़ंप मच गया। अगर जांच में यह व्यक्ति वास्तव में बांग्लादेशी नागरिक निकला तो यह स्थानीय प्रशासन की बड़ी चूक मानी जाएगी। इस तरह के मामले न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के योजनाओं के सही लाभ पर भी असर डालते हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल
देशभर में बांग्लादेशी घुसपैठ और वहां अल्पसंख्यक समुदायों पर अत्याचार की चर्चाओं के बीच यह मामला स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। प्रशासन अब इस मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है। जांच के दौरान व्यक्ति के सभी सरकारी दस्तावेज — आधार कार्ड, वोटर आईडी, समग्र आईडी और बीपीएल कार्ड — की सत्यता की पुष्टि की जा रही है।

रहन-सहन और गतिविधियां
कौसल आलम नामक यह व्यक्ति बीते 5-6 वर्षों से मुकुंदपुर स्थित एक दरगाह परिसर में किराए से रह रहा था। उसने स्वयं को शिक्षक बताया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में झाड़-फूंक जैसे कार्य करता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसके माता-पिता का संबंध अन्य देशों से है। आधार कार्ड में ‘केयर ऑफ’ (अभिभावक) का नाम बदलकर उसे स्थानीय निवासी दिखाया गया, जिससे अन्य सरकारी पहचान पत्र और योजनाओं का लाभ भी उसे मिल गया।

आगे की कार्रवाई
मामले के खुलासे के बाद उसकी समग्र आईडी और बीपीएल कार्ड निरस्त कर दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई अधिकारिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ग्रामीणों और अधिकारियों का कहना है कि यह मामला स्थानीय प्रशासन की सतर्कता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

फर्जी दस्तावेज बनाए
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत आए इस व्यक्ति ने स्वयं को स्थानीय निवासी बताकर कई सरकारी दस्तावेज बनवा लिए थे। जांच में पाया गया कि वह बिना वैध एनओसी और नागरिकता प्रमाण पत्र के मैहर जिले में रह रहा था। उसने वोटर आईडी, आधार कार्ड, समग्र आईडी और बीपीएल हितग्राही कार्ड बनवा लिए, जबकि वह भारत का नागरिक नहीं था।

एसआईआर सर्वे से खुलासा
यह मामला तब उजागर हुआ जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सर्वे के दौरान उसका नाम अनमैप्ड पाया गया। सोशल मीडिया से मिली जानकारी के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की।
जनपद पंचायत अमरपाटन के सीईओ ने उसकी समग्र आईडी निरस्त कर दी है, और प्रकरण भोपाल मुख्यालय को भेजा गया। बीपीएल हितग्राही की जानकारी तहसीलदार को भी भेजी गई है।

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