AI समिट से ‘खदेड़ी’ गई यूनिवर्सिटी और तीन हजार करोड़ का शिक्षा साम्राज्य!

देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई समिट में चीनी रोबट डाग को अपना इनोवेश्न बताकर दुनिया भर में भारत की फजीहत करवाने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी को जहां समिट से बाहर खदेड दिया गया है है वहीं अब गलगोटिया समूह की संपत्ति पर चर्चा चल रही है। लोग कह रहे कि कैसे एक दुकान से अरबों का शिक्षा सामग्रज खड़ा कर दिया गया।

चीनी रोबोट, भारतीय दावा और दुकान से दौलत तक की कहानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट से शुरु हुआ जब एक रोबोटिक डॉग को गलगोटिया यूनिवर्सिटी का ‘इनोवेशन’ बताकर पेश किया गया। बाद में सोशल मीडिया पर खुलासा हुआ कि यह रोबोट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबटिक का मॉडल यूनिट्री जीओ-2 है। विवाद बढ़ा, आलोचना तेज हुई और खबरें आईं कि एक्सपो से गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटाने के निर्देश दिए गए। देखते ही देखते मामला देश की साख, इनोवेशन और ब्रांडिंग पर बहस में बदल गया।
लेकिन इस विवाद के बीच सवाल बड़ा है—आखिर यह यूनिवर्सिटी बनी कैसे?

कहानी शुरू होती है दिल्ली के कनॉट प्लेस की एक साधारण किताबों की दुकान ‘ईडी गलगोटिया एंड संस’ से। 1930 के दशक में शुरू हुआ यह बुक स्टोर शैक्षणिक प्रकाशन के लिए जाना जाता था। यही परिवार आगे चलकर शिक्षा क्षेत्र में उतरा। सुनील गलगोटिया ने वर्ष 2000 के बाद शिक्षा क्षेत्र में विस्तार शुरू किया। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज खोले गए। फिर 2011 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। कुछ ही वर्षों में यह समूह उत्तर प्रदेश के बड़े निजी शिक्षा ब्रांड्स में गिना जाने लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समूह की संपत्ति लगभग 3000 करोड़ रुपये आंकी जाती है—हालांकि यह आधिकारिक सार्वजनिक खुलासों पर आधारित नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्टस में 40,000 से अधिक छात्रों का दावा किया गया है, साथ ही 40+ देशों के विद्यार्थी, आधुनिक कैंपस, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल कोलैबोरेशन पर जोर
डॉ. ध्रुव गलगोटिया चला रहे गलगोटिया यूनिवर्सिटी
वर्तमान में सुनील गलगोटिया के बेटे डॉ. ध्रुव गलगोटिया के हाथ में यूनिवर्सिटी की कमान है। वही इसको चलाते हैं। जिनका फोकस ग्रोथ और इनोवेशन पर रहता है। वहीं आराधना गलगोटिया, यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर हैं।
एक दौर था जब किताबें बेची जाती थीं। फिर डिग्रियां बेची जाने लगीं। अब एआई और रोबोट के मंच पर ब्रांडिंग हो रही है। सवाल यह नहीं कि दुकान से साम्राज्य कैसे खड़ा हुआ— सवाल यह है कि इनोवेशन के नाम पर इंपोर्ट को कब तक पैकेजिंग में लपेटा जाएगा? एआई के मंच पर हुआ यह विवाद भले ही थम जाए, लेकिन शिक्षा और व्यवसाय के इस गठजोड़ पर बहस अभी लंबी



