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 जिला अस्पताल में मेडिकल-मरीज के बीच ‘आशा’ दलालों का जाल

सतना के District Hospital Satna में कमीशनखोरी का चौंकाने वाला खेल उजागर हुआ है। आरोप है कि कुछ आशा कार्यकर्ता मरीजों को तय समय से पहले डिस्चार्ज कराकर निजी मेडिकल स्टोर्स से महंगी दवाएं खरीदने का दबाव बनाती हैं। सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ती दवाओं की व्यवस्था के बावजूद मरीजों से हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। शिकायत सिविल सर्जन तक पहुंची है और 22 आशा कार्यकर्ताओं के नाम जांच के दायरे में हैं।

आरोप के साथ मरीज का खुलासा
मामला मझगवां ब्लॉक के पिपरी टोला गांव की एक महिला हितग्राही से जुड़ा है, जिसे 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती किया गया था। गायनी विभाग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 17 फरवरी को डिस्चार्ज तय था। आरोप है कि गांव की अधिकृत आशा के पहुंचने से पहले ही दूसरी आशा कार्यकर्ता ने कथित रूप से समय से पहले छुट्टी दिलवा दी। शिकायतकर्ता ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर अस्पताल परिसर में सक्रिय 22 कथित “दलाल” आशाओं के नाम उजागर किए।

मुफ्त दवा होते हुए भी 3500 की खरीदारी!
शिकायत के मुताबिक— विधिवत डिस्चार्ज कार्ड नहीं बनाया गया। निजी मेडिकल स्टोर से लगभग 3500 की दवाएं खरीदने को मजबूर किया गया। एम्बुलेंस के नाम पर 700 अतिरिक्त वसूले गए। यह सब अधिकृत आशा के पहुंचने से पहले कर लिया गया, ताकि मामले की भनक न लगे। सवाल यह है कि जब सरकारी अस्पताल में मुफ्त या रियायती दवाएं उपलब्ध हैं, तो मरीजों को निजी दुकानों की ओर क्यों धकेला जा रहा है?

शिकायत में 22 नाम, जांच के दायरे में नेटवर्क
शिकायत पत्र में जिन 22 आशा कार्यकर्ताओं के नाम शामिल बताए गए हैं, उन्हें प्रशासन को सौंप दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। अस्पताल के सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेन्द्र वर्मा ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और सूचना सीएमएचओ कार्यालय तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक को भेज दी गई है। मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया गया है।

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