सतना नगर निगम में खुली जंग! कमिश्नर को हटाने महापौर ने खोला मोर्चा, 29 पार्षदों संग सीएम के नाम ज्ञापन

सतना नगर निगम की सियासत अब दफ्तरों से निकलकर सड़कों और सर्किट हाउस तक पहुंच गई है। महापौर योगेश ताम्रकार और निगमायुक्त शेर सिंह मीना के बीच महीनों से चल रहा टकराव अब खुली लड़ाई में बदल गया है। बुधवार देर शाम महापौर ने 29 पार्षदों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस को सौंपकर आयुक्त को तत्काल हटाने की मांग कर दी।

6 माह से फाइलें लंबित: महापौर का आरोप
सर्किट हाउस में कलेक्टर से मुलाकात के दौरान महापौर ने आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों से पार्षदों की विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें आयुक्त कार्यालय में लंबित हैं। कई फाइलें वित्तीय स्वीकृति के बाद भी टेंडर प्रक्रिया में नहीं भेजी गईं। महापौर का दावा है कि 50 किलोमीटर डामर सड़क का प्रस्ताव लंबित है, जबकि शहर की सड़कों की हालत खराब है और जनता जनप्रतिनिधियों को घेर रही है।
परिषद में “गलत जानकारी” देने का आरोप
नगर निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी पालन ने परिषद में गलत जानकारी दिए जाने का आरोप लगाया। पार्षद पीके जैन ने हरिकिशन दास वाटिका से अतिक्रमण नहीं हटाने का मुद्दा उठाया। पार्षद अभिषेक तिवारी ने दावा किया कि ज्ञापन की खबर मिलते ही कुछ चुनिंदा फाइलों पर कार्रवाई शुरू की गई।
29 हस्ताक्षर, एक नाम चर्चा में
ज्ञापन पर 29 पार्षदों के हस्ताक्षर बताए गए हैं, लेकिन महापौर परिषद के सदस्य आदित्य यादव के हस्ताक्षर नहीं होने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भोपाल रवाना हुए महापौर
ज्ञापन सौंपने के बाद महापौर भोपाल रवाना हो गए हैं और मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराने की बात कही है। उनका कहना है कि “शहर का विकास बाधित है, प्रशासनिक कार्यशैली सुधारना जरूरी है।”




