ताजा ख़बरें

910.384 हेक्टेयर जमीन पर 40 साल की खनन लीज! तीन हजार से अधिक किसान प्रभावित होने की आशंका

सतना जिले की रामपुर बाघेलान तहसील में 910.384 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि को 40 वर्षों की खनन लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू होने से किसानों में भारी आक्रोश है। गजट नोटिफिकेशन जारी कर Dalmia Bharat Limited को वार्षिक भूतल प्रतिकर (सरफेस कम्पनसेशन) के आधार पर खनन प्रयोजन हेतु स्वीकृति देने की कार्रवाई जारी है। अनुविभागीय अधिकारी, रामपुर बाघेलान द्वारा सार्वजनिक सूचना जारी कर आपत्तियां मांगी गई हैं।

प्रस्तावित भूमि में ग्राम जमुना की 89.234 हेक्टेयर में से 17.977 हेक्टेयर, जनार्दनपुर, बैरिहा और पटरहाई की 575.830 हेक्टेयर में से 341.901 हेक्टेयर तथा पगरा, झिरिया बाजपेयी, झिरिया कोठार और झिरिया कोपरिहान की 245.320 हेक्टेयर में से 161.253 हेक्टेयर भूमि शामिल है। जानकारों का अनुमान है कि इन गांवों के तीन हजार से अधिक किसान परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं, जो वर्षों से खेती-किसानी कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि शासन-प्रशासन ने जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया तो तेज कर दी, लेकिन पुनर्वास, बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा और परिवार के सदस्यों को स्थायी रोजगार जैसे मुद्दों पर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं रखी। ग्रामीणों का कहना है कि 40 साल की माइनिंग लीज का अर्थ है खेतों का स्थायी नुकसान। एक बार खनन शुरू होने के बाद उपजाऊ मिट्टी, जलस्रोत और पर्यावरणीय संतुलन बुरी तरह प्रभावित होंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी पुश्तैनी जमीन से वंचित हो जाएंगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलेन्द्र सिंह कमलू ने दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व और भविष्य का सवाल है। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक विक्रम सिंह विक्की, सांसद गणेश सिंह और प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से प्रभावित गांवों में जाकर संवाद करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सालाना प्रतिकर के एवज में दी गई जमीन पर आवश्यकता पड़ने पर वे खेती या अन्य उपयोग नहीं कर पाएंगे। बेटियों के विवाह, इलाज या आपात जरूरतों के लिए जमीन ही सबसे बड़ा सहारा होती है। यदि सरकार ने स्पष्ट पुनर्वास नीति और लिखित रोजगार गारंटी नहीं दी, तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

Related Articles

Back to top button
Close