राजनीति

नगर निगम सतना में फिर सुलगी सियासी आग: महापौर–कमिश्नर टकराव ने दोहराया इतिहास

सतना। सतना नगर निगम एक बार फिर सियासी रणभूमि में तब्दील हो गया है। महापौर योगेश ताम्रकार और नगर निगम आयुक्त शेर सिंह मीना के बीच छिड़ा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन शहर से लेकर भोपाल तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब सतना नगर निगम में महापौर और कमिश्नर आमने-सामने आए हों। इससे पहले भी ऐसे टकराव सुर्खियों में रह चुके हैं।

9 साल पुराना विवाद फिर याद आया

नवंबर 2017 में तत्कालीन महापौर ममता पांडेय और उस समय की नगर निगम आयुक्त, वर्तमान रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल के बीच परिषद की बैठक में तीखा विवाद हुआ था। भाषाशैली को लेकर शुरू हुई बहस इतनी बढ़ी कि महापौर द्वारा आयुक्त को “औकात में रहने” की नसीहत देने की बात प्रदेशभर में सुर्खियों में रही। प्रशासनिक स्तर पर भले पत्राचार न हुआ हो, लेकिन राजनीतिक अदावत खुलकर सामने आ गई थी।

दो महापौरों का सीधा टकराव

नगर निगम सतना में एक कार्यवाहक सहित भाजपा के पांच महापौर रहे हैं। इनमें से दो कार्यकाल ऐसे रहे, जब महापौर और कमिश्नर का सीधा टकराव सार्वजनिक हुआ। वर्तमान घटनाक्रम में महापौर द्वारा पार्षदों के साथ आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलना उसी परंपरा की अगली कड़ी माना जा रहा है।

ज्ञापन पर उठे सवाल

महापौर के नेतृत्व में पार्षदों द्वारा आयुक्त को हटाने के लिए दिया गया ज्ञापन पिछले दो दिनों से शहर में चर्चा का केंद्र है। ज्ञापन में आरोप है कि पिछले छह महीनों से विकास कार्यों की फाइलें रोकी जा रही हैं। हालांकि राजनीतिक जानकार सवाल उठा रहे हैं कि आयुक्त लगभग दो वर्षों से पदस्थ हैं और हाल ही में शहर में विकास कार्यों की उपलब्धियों का दावा भी किया गया था। ऐसे में अचानक टकराव की वजह क्या है?

मेयर बनाम स्पीकर की पुरानी खींचतान

नगर निगम में जनप्रतिनिधियों के बीच भी टकराव का इतिहास रहा है। भाजपा शासित निगम में भी महापौर और स्पीकर के बीच कई बार 36 का आंकड़ा देखने को मिला। ममता पांडेय के समय स्पीकर अनिल जायसवाल से मतभेद रहे, वहीं अन्य कार्यकालों में भी आंतरिक खींचतान सामने आती रही। हालांकि मौजूदा दौर में महापौर और स्पीकर के बीच तालमेल दिखाई दे रहा है।

सियासत या विकास की लड़ाई?

शहर में धूल उड़ती सड़कों, अधूरी नालियों और गड्ढों की शिकायतों के बीच यह विवाद और भी संवेदनशील हो गया है। जनता विकास चाहती है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे शक्ति-संतुलन की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव स्थानांतरण तक पहुंचेगा या फिर समझौते की राह निकलेगी। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि सतना नगर निगम में सियासी आग एक बार फिर धधक उठी

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