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सुनियोजित अराजकता का खेल! गायब हुए कथित कर्मचारी, पुलिस व गार्ड भी नदारद

गुप्त गोदावरी में अवैध वसूली को ‘लाइसेंस’ देने की तैयारी?

चित्रकूट। चित्रकूट के पवित्र पर्यटन स्थलों पर फैली अराजकता अब सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल का रूप लेती दिख रही है। अवैध वसूली और शॉर्टकट दर्शन की खबरें सामने आने के बाद अचानक कथित कर्मचारी, दो पुलिसकर्मी और निजी सुरक्षा गार्ड गायब हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा माहौल जानबूझकर इस तरह तैयार किया गया ताकि पाँच कथित लोगों के नाम आउटसोर्सिंग में दर्ज कर उन्हें गुप्त गोदावरी में अवैध वसूली का अनौपचारिक लाइसेंस दिया जा सके। बताया जा रहा है कि पार्षदों और कुछ कर्मचारियों द्वारा दी गई गलत व भ्रामक रिपोर्ट के चलते स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि “हर कोई अपना आदमी बैठाकर मलाई खाना चाहता है”, जिसका सीधा असर श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासन की छवि पर पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि पूरे चित्रकूट, हनुमान धारा जैसे अन्य धार्मिक स्थलों को छोड़कर काली कमाई करने वालों की नजर सिर्फ गुप्त गोदावरी पर टिक गई है। सीमित जगह, अधिक श्रद्धालु और शॉर्टकट रास्तों का फायदा उठाकर सुनियोजित अवैध वसूली की जा रही है।

स्थानीय जनों का साफ कहना है कि चंद सफेदपोश और कथित कर्मचारियों की वजह से पूरे प्रशासनिक सिस्टम को कटघरे में खड़ा होना पड़ रहा है। यदि समय रहते पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

लोगों की मांग है कि प्रशासन बिना किसी दबाव के बिना राजनीतिक या स्थानीय सिफारिश के पूरी पारदर्शिता के साथ यहां की व्यवस्था को संभाले, ताकि पवित्र धार्मिक स्थल की बदनामी न हो और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

अब बड़ा सवाल यह है—
क्या प्रशासन चंद प्रभावशाली लोगों के दबाव से ऊपर उठकर कार्रवाई करेगा, या फिर गुप्त गोदावरी को अवैध वसूली का अड्डा बनने दिया जाएगा??

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