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200 करोड़ के विश्वस्तरीय स्टेशन का सांड ने किया निरीक्षण! 10 दिन में दूसरी बार सुरक्षा व्यवस्था का ‘मौका-मुआयना’

सतना। विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस हो रहे सतना जंक्शन की सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उस वक्त उजागर हो गई, जब एक सांड ने 200 करोड़ की लागत से बन रहे रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर डाला। हैरानी की बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि 10 दिन के भीतर दूसरी बार सांड स्टेशन परिसर में खुलेआम टहलता नजर आया।
इससे पहले 27 दिसंबर की रात करीब 11 बजे एक अन्य सांड प्लेटफॉर्म नंबर-1 से निरीक्षण करता हुआ प्रतीक्षालय होते हुए बाहर निकल गया था। उस दौरान करीब 13 मिनट तक सांड स्टेशन परिसर में मौजूद रहा, लेकिन रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को इसकी भनक तक नहीं लगी।
9 जनवरी को फिर सांड का आगमन हुआ, जिसने बिना किसी रोक-टोक के स्टेशन का जायजा लिया।
गनीमत यह रही कि इस बार सांड ने ‘मानवता’ का परिचय देते हुए किसी यात्री को न तो सींगों पर उठाया, न ही सांडगिरी दिखाई। यदि ऐसा हो जाता, तो प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहे हजारों यात्रियों की जान बचती या नहीं — यह केवल ईश्वर ही जानता।
विंध्य का प्रवेश द्वार कहे जाने वाला सतना जंक्शन प्रदेश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले स्टेशनों में शामिल है, लेकिन यहां यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह राम भरोसे दिखाई दे रही है। कभी सांड, तो कभी आवारा कुत्तों का आतंक — कब कौन सी अनहोनी हो जाए, कहना मुश्किल है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के लिए भले ही यह कोई बड़ी घटना न हो, क्योंकि जब आला अधिकारी सिर्फ कागजी निरीक्षण करते हों, तो सांड द्वारा किया गया निरीक्षण भी औपचारिक ही माना जाएगा।
रेलवे की यह अनदेखी सवाल खड़े करती है — क्या किसी बड़ी भगदड़ या हादसे के बाद ही जिम्मेदार जागेंगे? या फिर मुआवजे की औपचारिक घोषणा कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
सवाल साफ है — क्या आम जनता की जान की कीमत सिर्फ फाइलों और आंकड़ों तक सीमित रह गई है?
अगर ऐसी घटना किसी वीआईपी या नेता के सामने होती, तो क्या हालात ऐसे ही रहते?

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