रामजानकी मंदिर पर अवैध कब्जे का साया! पुजारी के स्वर्गवास के बाद तेज़ हुई साजिशें, शासनाधीन मंदिर पर निजी निगाहे
Written by:Shatrughan singh Published:19 January 2026 at 19: 17 IST

सतना। प्रभु श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट के जानकीकुंड क्षेत्र में स्थित रामजानकी मंदिर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। मंदिर और उससे लगी भूमि पर अवैध कब्जे और अधिकार जताने की कोशिशों के आरोप सामने आए हैं, जबकि यह मंदिर शासन के अधीन है और इसका प्रबंधन जिला कलेक्टर, सतना के अधीन बताया जाता है. सोमवार को मंदिर परिसर में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ संत मंदिर से जुड़े मुद्दों को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर संतों को समझाने का प्रयास करते रहे। विवाद का केंद्र पुजारी की नियुक्ति और मंदिर भूमि का नियंत्रण बना हुआ है।
पुजारी के निधन के बाद बढ़ा विवाद
मंदिर के पुजारी स्वर्गीय नवलकिशोर दास का 9 अक्टूबर 2025 को निधन हो गया था। इसके बाद से मंदिर और उससे जुड़ी जमीन को लेकर गतिविधियां तेज़ हो गईं। बताया गया कि नवलकिशोर दास के जीवनकाल में मंदिर की सेवा, पूजा-पाठ और देखरेख की जिम्मेदारी उनके शिष्य मिथलेश कुमार निभाते आ रहे थे, लेकिन अब कुछ लोग नए पुजारी की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले पर निगरानी रखी जा रही है।

क्या है पूरा मामला
जानकीकुंड के पास स्थित रामजानकी मंदिर की भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। नयागांव हल्का स्थित आरजी नंबर 943, कुल रकबा लगभग 52 आयरे है (13 डिस्मिल) भूमि शामिल है। इसके अतिरिक्त मंदिर से लगी लगभग 15 डिस्मिल से अधिक भूमि भी विवाद के दायरे में बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों की निगाहें इसी जमीन पर टिकी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार यह विवाद 1991 से विभिन्न रूपों में चलता आ रहा है, लेकिन पुजारी के निधन के बाद इसे निर्णायक मोड़ पर ले जाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।
प्रशासन को सौंपा गया था मंदिर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व में मंदिर और उससे लगी भूमि के उत्तराधिकारी बालमुकुंद दास थे। उन्होंने लिखित रूप से मध्यप्रदेश शासन को मंदिर और उससे जुड़ी भूमि को शासन के अधीन लेने की सहमति दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने गुरुभाई श्यामदास को मंदिर का पुजारी नियुक्त किया। श्यामदास के निधन के बाद 19 अप्रैल 1991 को शासन द्वारा नवलकिशोर दास को मंदिर का पुजारी नियुक्त किया गया। बाद में रामआश्रय शुक्ला सहित कुछ अन्य लोगों ने मंदिर और भूमि पर अधिकार जताया, मामला न्यायालय पहुंचा, जहां उनकी रजिस्ट्री निरस्त कर दी गई और मंदिर पुन: शासनाधीन घोषित हुआ।
2007-08 में बना ट्रस्ट
वर्ष 2007-08 में रामजानकी मंदिर को ट्रस्ट के रूप में गठित किया गया। ट्रस्ट का प्रबंधक सतना कलेक्टर को बनाया गया। साथ ही मझगवां एसडीएम को भी समिति में शामिल किया गया। वर्तमान में ट्रस्ट की 11 सदस्यीय समिति में—
सचिव- जितेंद्र गुप्ता (भोपाल), कोषाध्यक्ष- कमलेश गुप्ता (भोपाल) सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।
डॉक्टर पर अवैध कब्जे का आरोप
मंदिर को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक डॉक्टर द्वारा मंदिर की भूमि पर लगभग 10 बाई 40 वर्गफीट क्षेत्र में अवैध कब्जा कर निजी क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। पुजारी के निधन के बाद मंदिर और उससे जुड़ी भूमि पर दोबारा कब्जे की कोशिशें तेज़ होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
शिष्य भयभीत
पुजारी नवलकिशोर दास के शिष्य मिथलेश कुमार ने बताया कि वे पिछले चार दिनों से भय के कारण मंदिर नहीं जा पा रहे हैं। इससे मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना प्रभावित हो रही है और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कलेक्टर कार्यालय में मामला लंबित
सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रबंधन और पुजारी नियुक्ति से जुड़ा मामला सतना कलेक्टर कार्यालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रामजानकी मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति भी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में कब और कैसे प्रशासन कार्यवाही करता है।




