अकौना पीएम आवास फर्जीवाड़ा: 44 दिन बाद आई जांच रिपोर्ट, दोषियों को बचाने दबाए गए तथ्य
जिम्मेदार अधिकारियों पर मेहरबानी, हितग्राहियों पर ही फोड़ा गया ठीकरा

सतना। रामपुर बाघेलान विकासखंड की ग्राम पंचायत अकौना में सामने आए प्रधानमंत्री आवास योजना के फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट 44 दिन बाद सार्वजनिक तो हुई, लेकिन रिपोर्ट ने पारदर्शिता की बजाय सवालों की नई फेहरिस्त खड़ी कर दी है। आरोप है कि जांच कमेटी ने दोषियों को बचाने के लिए कई अहम तथ्यों को दबा दिया और पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से परहेज किया।
जिन प्रकरणों में फर्जीवाड़ा स्पष्ट रूप से प्रमाणित था, वहां आवास सत्यापन अधिकारी, ग्राम सचिव और रोजगार सहायक को बचाते हुए पूरा दोष हितग्राहियों पर डाल दिया गया। कई मामलों में हितग्राहियों की पात्रता या अपात्रता का स्पष्ट उल्लेख तक जांच रिपोर्ट में नहीं किया गया, जिससे प्रतिवेदन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीएम आवास घोटाला सामने आने के बाद जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर 9 सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच दल ने ग्राम पंचायत अकौना के 133 हितग्राहियों के आवासों का भौतिक सत्यापन कर 28 पृष्ठों की रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ को सौंपी। हालांकि रिपोर्ट में अनेक अपात्र हितग्राहियों का नाम तो दर्ज है, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका को नजरअंदाज किया गया।
जमीनें होने के बावजूद मिला आवास
वित्तीय वर्ष 2021-22 में व्यंकटेश प्रताप सिंह (आवास आईडी एमपी 5530299) के नाम पर कई भूमि दर्ज होने के बावजूद उन्हें पीएम आवास का लाभ दिया गया। जांच में अपात्रता सामने आई, लेकिन कार्रवाई केवल हितग्राही तक सीमित रखी गई।
इसी तरह 2024-25 में धर्मराज तिवारी (आवास आईडी एमपी 148833187) के पास कृषि योग्य भूमि होने और पत्नी के नाम की जमीन छिपाने के बावजूद पीएम आवास स्वीकृत किया गया। यहां भी दोष केवल हितग्राही पर मढ़ दिया गया।
पात्रता पर ही नहीं दिया गया जवाब
वित्तीय वर्ष 2016-17 में बुद्धमान सिंह को पीएम आवास स्वीकृत किया गया। जांच में कई कृषि भूमि होने का उल्लेख तो किया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे पात्र थे या अपात्र। इसी प्रकार 2021-22 में आवास आईडी एमपी 113950839 के प्रकरण में भी जांच रिपोर्ट अस्पष्ट रही।
पक्का मकान के ऊपर बना दिया नया आवास
रामबहोर साहू को वर्ष 2021-22 में पीएम आवास का लाभ दिया गया, जबकि उनके पास पहले से चार कमरों का पक्का मकान मौजूद था। इसके बावजूद उन्हें आवास स्वीकृत कर दिया गया और उन्होंने पुराने मकान के ऊपर नया मकान भी बना लिया। जांच रिपोर्ट में रोजगार सहायक की सेवा समाप्ति का उल्लेख है, लेकिन बाद में उसे किसके आदेश से बहाल किया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।
कुल मिलाकर अकौना ग्राम पंचायत की जांच रिपोर्ट ने निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण अब पूरे मामले की पुनः निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।




