चित्रकूट नगर परिषद में आउटसोर्स भर्ती का खेल, 19 पद बढ़ाकर अपने लोगों को बैठाने की तैयारी!

चित्रकूट। नगर परिषद चित्रकूट में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। वर्ष 2025 में जहां 85 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं वर्ष 2026 के लिए 104 कर्मचारियों को रखने पर मुहर लगा दी गई है। यानी सीधे-सीधे 19 अतिरिक्त पद बढ़ाए गए हैं, जिन्हें कथित तौर पर नेताओं और प्रभावशाली लोगों के करीबियों से भरने की तैयारी है।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा मामला एक पूर्व नियोजित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया है। बढ़ाए गए 19 पद ऐसे हैं, जिन पर “किसी न किसी नेता का आदमी” बैठाया जाएगा। इससे नगर परिषद पर हर साल लाखों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जो अंततः सरकारी खजाने से ही जाएगा।
अब निर्माण नहीं, सीधे खजाने पर डाका!
अब तक नगर परिषद पर निर्माण कार्यों और अन्य योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन पहली बार मामला सीधे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर वेतन के जरिए सरकारी धन की बंदरबांट का बताया जा रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ पार्षदों ने बताया कि परिषद में विकास कार्यों से ज्यादा ध्यान अपनी-अपनी जेब भरने के रास्ते खोजने पर है। साढ़े तीन साल के कार्यकाल में शहर में कोई बड़ा बदलाव न दिखने का यही मुख्य कारण है।
अध्यक्ष पर हावी पार्षद, फैसले ठप
पार्षदों का आरोप है कि नगर परिषद अध्यक्ष पर कुछ पार्षद और बाहरी दबाव हावी हैं, जिसके चलते कोई भी निर्णय पारदर्शी और सही तरीके से नहीं लिया जा रहा। नतीजतन परिषद की कार्यप्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
तीन ग्रुप, एक निकाय – ‘मठाधीशों की फौज’
नगर परिषद के अंदरखाने से जो जानकारी सामने आई है, वह और भी चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि परिषद में तीन ताकतवर गुट सक्रिय हैं—
डीआरई ग्रुप, जो जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाता है
विधायक समर्थक ग्रुप, जो अपनी बात मनवाने में लगा रहता है
पार्षद ग्रुप, जो अलग-अलग खेमों में बंटा हुआ है
इन तीनों के बीच खींचतान के चलते न तो अध्यक्ष और न ही सीएमओ स्वतंत्र रूप से काम कर पा रहे हैं। हालात यह हैं कि कार्यालय से लेकर फील्ड तक अराजकता और ‘भर्राशाही’ का माहौल बना हुआ है।
जांच की मांग तेज
अब सवाल यह है कि क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की वास्तव में जरूरत थी, या यह सिर्फ अपने लोगों को एडजस्ट करने का तरीका है? इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज होती जा रही है।




