जंगल में नशे का गोदाम! सतना में 28 लाख की कफ सिरप पकड़ी, ‘जस्सा’ नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी चोट

सतना। सतना जिले में नशे का कारोबार अब शहरों से निकलकर जंगलों तक फैल चुका है। शुक्रवार शाम पुलिस ने नागौद क्षेत्र के परसमनिया जंगल स्थित मड़फई गांव में दबिश देकर 28 लाख रुपये की नशीली कफ सिरप बरामद की, जिसने पूरे जिले में चल रहे ड्रग नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। एक सुनसान गांव में बने मकान को नशे का गोदाम बना दिया गया था। पुलिस ने यहां से 120 पेटी प्रतिबंधित कफ सिरप, करीब 14 हजार शीशियां जब्त कीं। इस मामले में एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई आरोपी अभी फरार हैं।
कुख्यात ‘जस्सा’ का नेटवर्क सक्रिय
पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरी खेप कुख्यात तस्कर अनूप जायसवाल उर्फ ‘जस्सा’ के नेटवर्क से जुड़ी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से यह नेटवर्क उचेहरा, नागौद और आसपास के इलाकों में नशीली कफ सिरप की सप्लाई कर रहा था।
सवाल यह है कि— इतनी बड़ी खेप लंबे समय तक कैसे छिपी रही? क्या स्थानीय स्तर पर किसी का संरक्षण मिला हुआ था?
महिला का घर बना नशे का अड्डा पुलिस ने जिस मकान पर छापा मारा, वह चौरसिया देवी साकेत का है। पूछताछ में सामने आया कि तस्करों ने उसके घर को अस्थायी गोदाम में बदल दिया था। जब पुलिस ने ताला तुड़वाया, तो अंदर कफ सिरप की पेटियों का अंबार देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
रोज के हिसाब से मिलता था किराया
चौरसिया देवी ने बताया कि भुरहरा गांव के मनीष यादव और शैलेंद्र गुप्ता उर्फ टिंकू उसके घर में यह माल रखवाते थे।
जितने दिन माल रखा जाता उतने दिन का रोजाना भुगतान किया जाता यानी नशे के धंधे में गरीबी और मजबूरी को भी हथियार बनाया गया।
मोबाइल से चलता था पूरा ऑपरेशन
आरोपियों ने कबूला कि— उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से निर्देश मिलते थे कहां से माल उठाना है कब और किस रास्ते से ले जाना है
उचेहरा और नागौद क्षेत्र में पहले से डंप की गई कफ सिरप को पिकअप वाहनों से जंगल किनारे लाकर छिपाया जाता था, ताकि पुलिस की नजर न पड़े।
तीन आरोपी फरार, बड़ा नेटवर्क बाकी
इस कार्रवाई में पुलिस ने भले ही तीन लोगों को पकड़ लिया हो, लेकिन तीन अन्य आरोपी फरार हो गए हैं। पुलिस मान रही है कि यह केवल एक खेप थी और जिले में इससे कहीं बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
सबसे बड़ा सवाल
इतने बड़े नशे के कारोबार की भनक पहले क्यों नहीं लगी? क्या ‘जस्सा’ नेटवर्क के तार जिले के बाहर तक जुड़े हैं? क्या इस कार्रवाई के बाद बड़े चेहरे बेनकाब होंगे, या मामला छोटे प्यादों तक सिमट जाएगा? जंगल में मिला यह गोदाम सिर्फ नशा नहीं,
पूरे सिस्टम की लापरवाही की कहानी सुना रहा है।




