इंदौर हादसे के बाद भी नहीं चेता सतना नगर निगम, शहर में अब भी हो रही दूषित पानी की सप्लाई

सतना। इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद भी सतना नगर निगम ने कोई ठोस सबक नहीं लिया है। शहर के कई इलाकों में लगातार दूषित और खारा पानी सप्लाई किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी पानी की गुणवत्ता सुधारने में अब तक असफल रहे हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, सतना की है, जहाँ छात्रों और ट्रेनी डॉक्टरों को 1100 से अधिक टीडीएस (TDS) वाला पानी सप्लाई किया जा रहा है। जबकि पीने योग्य पानी का मानक टीडीएस 300 से 400 के बीच होना चाहिए।
पानी की समस्या को लेकर मेडिकल कॉलेज के छात्रों और प्रशिक्षु डॉक्टरों ने पूर्व में प्रदर्शन भी किया था और सतना कलेक्टर व मेडिकल कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत-पत्र सौंपा था। पत्र में छात्रों ने बताया कि कॉलेज परिसर में हर महीने कम से कम 5 से 6 बार पाइपलाइन फटने के कारण पानी की सप्लाई बंद हो जाती है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पीने के पानी की कमी और वॉशरूम में पानी न होने से स्वच्छता और दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं। अत्यधिक खारे पानी के उपयोग से छात्रों को बाल झड़ने, आँखों से जुड़ी समस्याएँ सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो रही हैं।
छात्रों ने यह भी बताया कि कॉलेज की पाइपलाइन काफी पतली और घटिया गुणवत्ता की है, जिसके कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने प्रशासन से नई पाइपलाइन बिछाने या पानी के स्रोत पर ही फिल्ट्रेशन की व्यवस्था करने की मांग की है। शिकायत-पत्र में भविष्य को लेकर भी चिंता जताई गई है। छात्रों का कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज परिसर में अस्पताल का निर्माण होगा, तब इसी खारे पानी से मेडिकल उपकरणों की सफाई की जाएगी, जिससे उपकरणों के खराब होने की आशंका है।
इंदौर जैसी दुखद घटना के बाद भी यदि समय रहते सतना में पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो हालात कभी भी गंभीर हो सकते हैं। अब देखना यह है कि नगर निगम और जिला प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आम जनता व मेडिकल छात्रों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।



