शिक्षा

आंसुओं और आशा के बीच: बैगा आदिवासी बिटिया अनामिका की गुहार सुनी, डॉक्टर बनने का सपना होगा साकार

Written by:Shatrughan singh Published:10 January 2026 at 16: 22 IST

सीधी। “मैं बैगा आदिवासी हूं… मुझे डॉक्टर बनना है, लेकिन मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं हैं कि मुझे पढ़ा पाएं।”
आंखों में आंसू और आवाज़ में उम्मीद लिए यह मार्मिक गुहार आदिवासी बिटिया अनामिका बैगा की है, जिसने सीधी दौरे पर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने की कोशिश की थी।

मुख्यमंत्री सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान अनामिका सुरक्षाकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही कि उसे एक बार मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने दी जाए, लेकिन शुरुआत में उसे मिलने नहीं दिया गया। अनामिका का कहना है कि वह पहले ही विधायक, सांसद और कलेक्टर के पास अपनी फरियाद लेकर जा चुकी थी, मगर हर जगह से उसे निराशा ही मिली।

अनामिका की बस एक ही इच्छा थी—
“एक बार मेरी बात सुन लीजिए… मैं पढ़ना चाहती हूं, डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करना चाहती हूं।”
यह दृश्य उस समय पूरे प्रदेश के सामने सवाल बनकर खड़ा हो गया कि बैगा आदिवासी समाज की इस होनहार बेटी की आवाज़ क्या यूं ही दबा दी जाएगी? जिस प्रदेश में ‘लाड़ली बहना योजना’ जैसी योजनाओं पर हर माह हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, वहां क्या एक प्रतिभाशाली आदिवासी बालिका के सपनों के लिए कोई रास्ता नहीं निकल सकता?
आखिरकार अनामिका की आवाज़ शासन तक पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ संज्ञान में लेते हुए अनामिका की बात सुनी और उसके डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश की कोई भी प्रतिभावान बेटी केवल आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों से वंचित नहीं रहेगी। बैगा आदिवासी समाज से आने वाली अनामिका को शिक्षा के लिए हरसंभव शासकीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वह निर्बाध रूप से अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनामिका की शैक्षणिक योग्यता, पारिवारिक आर्थिक स्थिति और भविष्य की पढ़ाई की आवश्यकताओं का आकलन कर विशेष सहायता पैकेज तैयार किया जा रहा है। साथ ही छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सहयोग और अन्य शासकीय योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील और मानवीय निर्णय से आदिवासी समाज सहित आमजन में संतोष और उम्मीद का माहौल है। लोगों का कहना है कि यह फैसला न केवल अनामिका के भविष्य को नई दिशा देगा, बल्कि प्रदेश की उन हजारों बेटियों के लिए भी उम्मीद और प्रेरणा बनेगा, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।
अनामिका बैगा का कहना है कि अब उसे पूरा विश्वास है कि उसकी मेहनत और सरकार के सहयोग से उसका डॉक्टर बनने का सपना जरूर पूरा होगा।

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